सिडकुल पंतनगर स्थित डॉल्फिन कंपनी के नियमित श्रमिक गैरकानूनी तरीके से अस्थायी रूप में समायाेजित करने के विरोध में आमरण अनशन कर रहे हैं। श्रमिकों की मांग के समर्थन में गुरुवार को हल्द्वानी स्थित श्रम भवन धरना-प्रदर्शन हुआ। डॉल्फिन कंपनी के मजदूर 28 अगस्त 2024 से हड़ताल पर हैं। श्रमिकों का आरोप है कि कंपनी श्रम कानूनों को दरकिनार कर स्थायी मजदूरों को गैरकानूनी तरीके से अस्थाई रूप में समायोजित कर कर रही है।
गुरुवार को हल्द्वानी में जुटे प्रदर्शनकारियों ने श्रम विभाग, प्रशासन से लेकर स्थानीय विधायक आदि को मामले से अवगत कराते हुए न्याय की मांग की। कहा कि कंपनी प्रबंधन हठधर्मिता पर बना हुआ है। श्रम विभाग भी मजदूरों को न्याय दिलाने में असफल रहा है। श्रम मंत्री का कार्यभार स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी संभाल रहे हैं। कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए मुख्यमंत्री धामी से आगे आने की मांग की गई।

मुकदमे दर्ज होने के बाद भी नहीं दबी आवाज
आरोप लगाया कि प्रशासन ने मजदूरों का हौसला तोड़ने के लिए चार मजदूरों, सामाजिक कार्यकर्ता राजेश सक्सेना और इंक़लाबी मजदूर केंद्र के कैलाश पर गुंडा एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया। दमन की कार्रवाई, श्रम कानूनों के घोर उल्लंघन, प्रशासन की उदासीनता के विरोध में 21 अक्टूबर से चार महिला मजदूरों सहित छह मजदूर आमरण अनशन पर हैं। महिला मजदूरों की हालत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती किया गया। यहां भी महिला मजदूरों का आमरण अनशन जारी है। उनका स्वास्थ्य नाजुक हालत में है। महिलाओं के आमरण अनशन को 25 दिन हो गए हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार चुप्पी साधे हैं।
इन संगठनों की रही भागीदारी
धरने व ज्ञापन देने वालों में प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, प्रगतिशील भोजनमाता यूनियन, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, इंक़लाबी मजदूर केंद्र, भाकपा-माले, मजदूर सहयोग केंद्र, ठेका मजदूर कल्याण समिति, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, भीम आर्मी, आनंद निशिकवा इम्प्लाइज यूनियन, सर्व श्रमिक निर्माण कर्मकार संगठन, मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान, संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे। यहां बिंदु गुप्ता, रजनी, पुष्पा, तुलसी, सुरेंद्र, महावीर, चंदन, महेश, बाबूलाल, शंभू शर्मा, नरेश सक्सेना, अभिलाख, भूपेंद्र, कैलाश पांडे, मुकेश भंडारी, नफीस अहमद खान, मुकेश गुप्ता, शंभू शर्मा, विरेन्द्र रावत, आनंद पांडे, चम्पा गिनवाल की मौजूदगी रही।





