समान नागरिक संहिता (UCC) की उपलब्धि के शोर के बीच इस कानून को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। उत्तराखंड में 26 जनवरी 2025 से को यूसीसी को लागू किया गया है। देहरादून निवासी एल्मसुद्दीन और अन्य, भीमताल निवासी सुरेश सिंह नेगी ने अलग-अलग याचिका दायर कर यूसीसी के प्रविधान में शामिल लिव इन रिलेशनशिप सहित मुस्लिम, पारसी आदि के वैवाहिक पद्धति की अनदेखी की बात कही गई है। साथ ही अन्य प्रविधानों को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने कुरान की आयतों और उसके सिद्धांतों का पालन करना याचिकाकर्ताओं के साथ-साथ मुस्लिम समुदाय का आवश्यक धार्मिक गतिविधि बताया है।
संविधान में किए प्रविधान का उल्लंघन
याचिकाकर्ता का कहना है कि मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद-25 के तहत अपने धर्म के स्वतंत्र पेशे और अभ्यास का मौलिक अधिकार है।यूसीसी को इस्लामी कानूनी स्रोत का उल्लंघन करार देते हुए बताया है कि कुरान की सूरह-अल-निसा अध्याय-चार आयत 23 याचिकाकर्ताओं और मुस्लिम समुदाय की आवश्यक धार्मिक प्रथा की प्रकृति में है, यूसीसी में इसके उल्लंघन का प्रविधान किया गया है। यूसीसी के बहाने अल्पसंख्यकों के रीति-रिवाजों की अनदेखी की बात भी कही गई है।
खंडपीठ कर सकती है सुनवाई
यूसीसी को संविधान के अनुच्छेद-14, 21 व 25 का उल्लंघन करार देते हुए विवादित प्रविधानों को रद करने का आग्रह किया गया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र की अध्यक्षता वाली खंडपीठ याचिकाओं पर सुनवाई कर सकती है।




