जिम कार्बेट की यादों का ट्रेक रूट: हमारे साथ देखें 436 लोगों की हत्यारिन बाघिन कहां हुई थी ढेर, और भी रहस्य

पर्यटन/विकास

अंग्रेज शिकारी, प्रकृति प्रेमी व वन्य जीव संरक्षक जिम कार्बेट ने अपने जीवन के 31 वर्ष चंपावत के जंगलों की खाक छानते हुए बिताए थे। नरभक्षी बाघ और गुलदार का शिकार करने के लिए कार्बेट ने चूका, चंपावत, तल्लादेश, पंचेश्वर से लेकर लधिया घाटी तक पैदल सफर किया। कार्बेट जहां से गुजरे उसे छह कार्बेट ट्रेल के रूप में विकसित किया जा रहा है। चंपावत वन विभाग ने ट्रेल के सहारे पर्यटन व स्वरोजगार को गति देने की योजना बनाई है। इस दिशा में काम शुरू हो गया है। 

अपनी किताब में किया है उल्लेख
आदमखोर बाघों की तलाश में जिम कार्बेट ने 1907 से 1938 तक चंपावत के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण किया। कार्बेट ने अपनी पुस्तकों में यहां के स्थलों की विशेषताओं का उल्लेख किया है। ये सभी पर्यटकों व प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करती हैं। ईको पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वन विभाग कार्बेट के प्रवास वाले स्थलों को ट्रेल के रूप में विकसित कर रहा है। छह ट्रेल के तहत सात वन विश्राम गृह, एक वन चौकी व पांच ट्रैक रूट का सुधारीकरण किया जाना है। जहां पर्यटक कार्बेट के स्थलों को देखने के साथ प्राकृतिक सौंदर्य के बीच विश्राम भी कर सकेंगे। चंपावत ट्रेल व बूल-कलढुंगा-चूका-टाक ट्रेल में साइन बोर्ड लग चुके हैं। ट्रेल के आसपास के गांवों में होम स्टे बनाए जाने हैं। नेचर व हेरिटेज गाइड प्रशिक्षण के लिए फरवरी 2025 तक का कैलेंडर बनाया है। पहले चरण का प्रशिक्षण पूर्ण हो चुका है। बालेश्वर, घटोत्कच, गोल्ज्यू मंदिर, चाय बागान, मायावती आश्रम, मानेश्वर धाम प्रमुख विरासत स्थल हैं।

ये पांच ट्रैक रूट

  • ठुलाकोट-डुमानी गधेरा ट्रैक- 0.8 मिमी
  • गौड़ी-बाघबरूड़ी ट्रैक- 0.5 किमी
  • चूका-टाक ट्रैक- 1.0 किमी
  • खेत-बमनगांव ट्रैक- 3.5 किमी
  • चल्थी-दुर्गापीपल ट्रैक- 29.6 किमी

ट्रेल का ऐतिहासिक महत्व भी जान लीजिए

  • चंपावत ट्रेल इसलिए खास है कि वर्ष 1907 में जिला मुख्यालय से आठ किमी दूर गंडल नदी के किनारे कार्बेट ने बाघ बरूड़ी नामक स्थान पर आदमखोर बाघिन को मारा था। बाघिन का 436 लोगों को मारना गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में अंकित है।
  • बूम-कलढुंगा-चूका-टाक ट्रेलमें वर्ष 1937 में लधिया-शारदा नदियों के संगम पर स्थित चूका में कार्बेट ने आदमखोर बाघ मारा था। 1938 में नेपाल सीमा पर स्थित टाक गांव में दूसरा आदमखोर बाघ मारा था।
  • तल्लादेश ट्रेलमें भारत-नेपाल सीमा पर स्थित ठुलाकोट गांव में जिम कार्बेट ने 1929 में आदमखोर बाघ का शिकार किया था। कहा जाता है बाघ ने 150 लोगों को मौत के घाट उतारा था।
  • पनार वैली ट्रेलमें चंपावत-अल्मोड़ा जिले की सीमा पर स्थित सलौनी गांव में 1910 में कार्बेट ने 400 लोगों का मारने वाले तेंदुए का शिकार किया। ये पनार आदमखोर नाम से प्रसिद्ध था।
  • देवीधुरा-पाटी-धूनाघाट ट्रेल में वर्ष 1907 व 1909 में टैंपल टाइगर के शिकार के लिए कार्बेट देवीधुरा आए। उस अभियान में कार्बेट असफल रहे। कार्बेट ने धूनाघाट में प्रवास किए। पाटी, लोहाघाट होते हुए चंपावत आए।
  • दुर्गापीपल-डांडा-लधिया वैली ट्रेलमें टाक आदमखोर बाघ को मारने अक्टूबर 1938 में कार्बेट नंधौर वैली होते हुए लधिया वैली पहुंचे। जहां दुर्गापीपल में विश्राम किया।

वेबसाइट से लीजिए जानकारी
वन विभाग ने jimcorbetttrail.com नाम से वेबसाइट बनाई है। अभी ये शुरुआती चरण में है। इसमें ट्रेल, ट्रैक रूट, चंपावत के विरासत स्थल, गाइड, होम स्टे आदि की समग्र जानकारी मिलेगी।

सीएम पुष्कर धामी की आदर्श चंपावत की परिकल्पना ध्यान में रखकर जिम कार्बेट ट्रेल विकसित किए जा रहे। यहां कार्बेट व उससे जुड़ी सभी जानकारी व्यापकता से मिलेगी। इससे ईको पर्यटन के साथ स्वरोजगार बढ़ेगा। लोनिवि की ओर से अवस्थापना के कार्य होने हैं।
-आरसी कांडपाल, डीएफओ, चंपावत वन प्रभाग

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