गुरु गोरखनाथ धाम में सतयुग से जल रही अखंड धूनी, ट्रेक रूट से पहुंच होगी आसान

पर्यटन/विकास

उत्तराखंड में एक धाम ऐसा भी जहां सतयुग से धूनी जलती आ रही है। श्रद्धालुओं की अपार आस्था का केंद्र गुरु गोरखनाथ धाम से जाना जाता है। चंपावत जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर तल्लादेश के मंच स्थित गुरु गोरखनाथ धाम में उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम की ओर से 271.39 लाख की लागत से ट्रैक रूट का विकास किया जा रहा है। इससे गुरु गोरखनाथ की मूर्ति की स्थापना, शौचालय, बाउंड्रीवाल, रेन वाटर हार्वेस्टिंग टैंक, मंदिर के तीन गेटों का पुनर्निर्माण, मंदिर परिसर में फर्श निर्माण कराया जाएगा। श्रद्धालुओं के बैठने के लिए बैंच लगाए जाएंगे। यहां से हिमालय दर्शन करने के लिए वाच टावर लगाने व कैफेटेरिया बनाने की योजना है।

मार्च 2025 तक पूरा होगा निर्माण कार्य
उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम के इंजीनियर दिनेश भट्ट ने बताया कि फिलहाल वाच टावर के निर्माण को छोड़कर अन्य कार्य पूरे करवाए जा रहे हैं। मार्च 2025 तक सभी कार्य पूरे करने हैं। डीएम नवनीत पांडे ने बताया कि जनपद के सभी ऐतिहासिक धार्मिक व पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों में पर्यटकों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के कार्य किए जा रहे हैं। पर्यटन सुविधाओं का विस्तार होने से यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाएगी। योजना की लागत 2.71 करोड़ से अधिक है।आध्यात्मिक व धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्व
गोरखनाथ धाम आध्यात्मिक एवं धार्मिक दृष्टि से जनपद का प्रमुख केंद्र है। सतयुग में गुरु गोरखनाथ ने यहां जो धूनी जलाई थी वह आज भी अनवरत जल रही है। खास बात यह है कि यहां प्रसाद के रूप में इसी धूनी की राख दी जाती है। मंदिर में करीब 400 वर्ष पूर्व चंद राजाओं की ओर से चढ़ाया गया घंटा भी मौजूद है। धाम में प्रतिवर्ष नाथ संप्रदाय के अनुयायियों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु व पर्यटक पहुंचते हैं।

चंपावत चाय बागान में बनेंगे ईको पार्क
चंपावत के चाय बागान में पर्यटन विभाग की ओर से इको पार्क बनाए जाएंगे। बगान में बच्चों को आकर्षित करने के लिए काटेज निर्माण भी किया जाएगा। इससे चाय बागान में बच्चों के साथ आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। चाय विकास बोर्ड प्रबंधन राकेश कुमार ने बताया कि आदर्श चंपावत जिले की परिकल्पना के अनुरूप बागान में पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।

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