आपसी विवाद के बाद महोत्सव दो हो गए, 12 ग्राम पंचायतों की रामलीला आज भी एक

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राम। दो अक्षर का यह नाम अपने में अनंत शक्ति, विश्वास और आस्था समेटे हुए है। इस नाम में इतनी शक्ति है कि किसी विवाद के बाद अपना-अपना महोत्सव आयोजित करने लगे 12 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण रामलीला मंचन के लिए एक हो जाते हैं। दोनों महोत्सव समिति के पदाधिकारी रामलीला मंचन के आयोजन में भागीदारी करते हैं। दो दशक पहले से जारी परंपरा अब भी बड़ी आत्मीयता से निभाई जा रही है। लोहाघाट ब्लाक के दूरस्थ चौमेल क्षेत्र में 1968 में रामलीला मंचन की शुरुआत हुई थी। किसी कारण से 1991 से 1999 तक रामलीला नहीं हो पाई। क्षेत्रवासियों के प्रयास से वर्ष 2000 में फिर रामलीला का मंचन शुरू हो गया।

इन ग्राम पंचायतों की भागीदारी
रामलीला मंचन में क्षेत्र के वल्सौं, चाचड़ी-सुतेड़ा, छतोली, मंगोली, चामी, लीदू, खेती-काकड़ी, चमरौली, मऊ, पुनियाल, शील-बरुड़ी, नेत्र-सलान आदि 12 ग्राम पंचायतों की भागीदारी रहती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार चामी क्षेत्र में 200 वर्षों से अषाढ़ी महोत्सव का आयोजन होता आ रहा है। रक्षाबंधन के दिन होने वाले मेले में दो क्षेत्रों से देवी डोले उठते हैं। दोनों डोले मंदिर तक आते थे। दो दशक पहले किसी विवाद व मनमुटाव के बाद ग्रामीणों ने वल्सौं में अलग मंदिर बनाकर रक्षाबंधन महोत्सव की शुरुआत की। दोनों एक ही अवधि में होते हैं। महोत्सव में कलाकार बुलाने, भव्य आयोजन करने को लेकर दोनों समितियों में प्रतिस्पर्धा रहती है, लेकिन रामलीला मिलकर आयोजित होती है।

दोनों की ओर से हरसंभव सहयोग
चामी अषाढ़ी महोत्सव समिति अध्यक्ष अशोक महर व वल्साैं रक्षाबंधन समिति अध्यक्ष अजय बिष्ट रामलीला आयोजित करने वाले श्रीराम सेवा एवं जन चेतना मंच चौमेल में उपाध्यक्ष हैं। दोनों महोत्सव समिति के पदाधिकारी रामलीला के आयोजन में बढ़-चढ़कर भागीदारी करते हैं। व्यवस्थाएं बनाने में ऐसे जुटते हैं जैसे घर का काम हो। जिसकी वजह से रामलीला की भव्यता व स्वरूप बना हुआ है।

नायब सूबेदार शिवदत्त जोशी की पहल
रामलीला कमेटी की जिम्मेदारी नायब सूबेदार (रिटायर्ड) शिव दत्त जोशी संभालते हैं। 2022 में इन्हें पांच वर्ष के लिए अध्यक्ष चुना गया था। इससे पहले 10 वर्ष तक सचिव रहे हैं। 2009 में भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए जोशी सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भागीदारी करते हैं। वह कहते हैं कि राम नाम की शक्ति हैं कि हर कोई एकजुट हो जाता है। अच्छाई के रास्ते पर चलने के साथ विद्वेष-कटुता मिटाकर सामाजिक सौहार्द व एकजुटता लाना ही रामलीला की सीख में शामिल है।

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