बदलते समय के साथ विद्युत शवदाह गृह का चलन बढ़ रहा है। छोटे शहरों में विद्युत शवदाह गृह में अंत्येष्टि करने को लेकर लोगों में संकोच हो, लेकिन कई बड़े शहरों में इसका उपयोग होता आ रहा है। कुमाऊं के सबसे बड़े शहर हल्द्वानी में पशुओं के लिए विद्युत शवदाह गृह की मांग उठने लगी है। एमबीपीजी कालेज से सेवानिवृत्त हिंदी के प्राध्यापक डॉ संतोष मिश्र का कहना है कि हल्द्वानी-काठगोदाम रोड पर दोनों ओर सरकारी विभागों की चहारदीवारी व पार्कों में सदाबहार और महक वाले बेलदार फूलों के पौधे रोपने की तैयारी है। वहीं सड़क पर चलते हुए अचानक किसी नहर, नाली या आसपास से उठती दुर्गंध से बचने के लिए नाक पर रुमाल रखना पड़े तो यह अच्छी बात नहीं है। नगर आयुक्त को पत्र भेजकर आग्रह किया है कि नगरवासियों को प्रदूषण, दुर्गंध तथा संक्रामक बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए विद्युत आधारित पशु शवदाह गृह का निर्माण किया जाना चाहिए।
हर दिन मरते हैं औसतन 50 जानवर
हल्द्वानी में प्रतिदिन 50 से अधिक आवारा और पालतू जानवर मरते हैं। इनमें कुत्ते, गाय, सांड़, बैल, बकरी, बिल्ली आदि पशु शामिल हैं। पशुओं की मौत होने पर फिलहाल लोग या तो इन्हें गाड़ देते हैं या शहर के सुनसान इलाकों में यहां-वहां फेंक देते हैं। लावारिश पशु तो कई दिन तक सड़क व आसपास पड़े रहते हैं। इस वजह से पशु प्रेमियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पालतू पशु की मृत्यु होने के बाद यहां वहां गाड़ने व फेंकने से शव कई-कई दिन तक सड़ता रहता है। प्रदूषण व पर्यावरण की दृष्टि से यह हानिकारक तो है ही साथ ही दुर्गंध से आसपास रहने वालों का सांस लेना मुश्किल हो जाता है। वर्तमान में शव गाड़ने की प्रक्रिया कठिन है और इसमें श्रमिकों को समय भी लगता है। निजी और सरकारी श्मशान घाटों की अनुपस्थिति में पालतू जानवरों के मालिकों के लिए अपने पालतू जानवरों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करने के विकल्प सीमित हैं।
पालतू पशु के लिए लगाया जाय शुल्क
डा. मिश्र ने कहा है कि शवदाह गृह में आवारा पशुओं का निःशुल्क दाह संस्कार किया जाय, जबकि घरेलू और पालतू पशुओं के लिए शुल्क तय किया जाय। इसी शुल्क से शवदाह गृह का रख-रखाव करना संभव हो पाएगा।
सम्मान के साथ होगा दाह संस्कार
बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिन्हें अपने पालतू पशु से खासा लगाव होता है और वे पशु का परिवार के सदस्य के समान ख्याल रखते हैं। इसी लगाव होने की वजह से वह उनका सम्मान से दाह संस्कार करना चाहते हैं। अभी पशु शवदाह गृह न होने से पालतू पशु की मृत्यु पर लोग उन्हें जंगल में फेंक आते हैं या कई बार नदी किनारे छोड़ आते हैं। शवदाह गृह बनने के बाद ऐसे व्यक्तियों को काफी राहत मिलेगी। दाह संस्कार करने के बाद अगर कोई पालतू पशु की अस्थियां ले जाना चाहता है तो वह ले जा सकेगा।
छह घंटे के भीतर निस्तारण करना अनिवार्य
मृतक पशुओं के शव निस्तारण के लिए लाइसेंसिंग अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के दृष्टिगत स्थान या क्षेत्र का निर्धारण करता है। कोई पशु स्वामी अपने पशु को दफन करना चाहें तो उसके लिए अनिवार्य होता है कि उसको दो मीटर नीचे गड्ढे में पशु की मृत्यु के छह घंटे के भीतर दफनाकर असंक्रमित कर तुरंत सकी लिखित सूचना कारण सहित नगर आयुक्त तथा लाइसेंस ठेकेदार या समिति को दी जानी चाहिए। पशु की मृत्यु के छह घंटे की भीतर लाइसेंस धारी/ठेकेदार/समिति पशु के शव का निस्तारण कराया जाना चाहिए। पर्यावरण प्रदूषण एवं संक्रमण की दृष्टि से यह भी सुनिश्चित किया जाय कि किसी भी दशा में मृतक पशुओं के शव का निस्तारण नदी, नाले, नहर, तालाब, खुले स्थान, किसी आबादी, स्कूल अथवा धार्मिक स्थल आदि के आसपास न किया जाए।






