दैवीय शक्ति प्राप्त श्रीराम जो चाहते थे उन्हें एक पल में प्राप्त कर सकते थे। आम व्यक्ति के साथी जी श्रीराम स्वयं जिस रास्ते पर चलते हैं उसे लोग आदर्श मानते हैं। अपनी सेना को आधिकारिक तौर पर नियुक्त किया गया। केवट और शबरी के गले को लगा हेलो की सीख दी। 14 वर्ष वन में शांति और धैर्य से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे। श्रीराम के जीवन से जुड़ी ये सीख समाज तक के लिए चंपावत के मल्लीहाट में जो मशाल आजादी से पहले जली थी उसका उजियारा आज भी चहुं ओर फैला हुआ है।
सामाजिक स्मारक की मिसाल
मैली हाट की सांप्रदायिक स्मारक की मिसाल है। हारमोनियम वादक इमाम बक्श लंबे समय से टेबल पर संगत देते आ रहे हैं। उस दौर में चंपावत में ही फोरम मंचन होने से चल्थी, अमोड़ी, धौन, वनलेख के आसपास के ग्रामीण इलाके थे। वाहनों की व्यवस्था न होने से पैदल चलने की व्यवस्था थी। भीड़ ऐसी थी कि लोग शेयर बाजार का आनंद लेते थे। 1985 के आसपास विद्युत के प्रकाश में धूम मची रही। 2010 में नागनाथ मंदिर के पास फर्म के लिए पक्का मंच बनाया गया।
अब आधुनिक उपकरणों का प्रयोग
पहले फोरम मंचन के दौरान सामान्य ध्वनि माइक होते थे। जिससे दर्शकों तक संवाद ठीक से नहीं पहुंच सके। दूर बैठे दर्शकों तक एनीसी कलाकारों की आवाज चुनी गई थी,प्रोडक्ट की आवाज बुलंद की गई थी। अब आधुनिक कलर माइक आने से संवाद स्पष्ट रूप से दिए गए हैं।
रामकाज में मूर्ति की भागीदारी
मल्लीहाट के द्वीप पचौली परिवार में चार श्रद्धालुओं से सहभागी बनी है। स्व. मथुरादत्त पचौली और उनके पिता ने केवल किसी कार्यक्रम में सहयोग नहीं किया, बल्कि अभिनय भी किया। वर्तमान में मथुरादत्त के पद पर मुक्तेश पचौली कलाकारों को अभ्यास के साथ-साथ अन्य छात्रों में सहयोग दिया जाता है। मुक्तेश के चाचा जगदीश पचौली कई वर्षों से दशहरा का प्रदर्शन कर रहे हैं।
कैरोसीन से मुलाकात नहीं हुई थी मंचन
फ्रीडम के पूर्व की कंपनी में दो बार आया है। 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध शुरू होने के दौरान मिट्टी का तेल न मिलने से फोरम के मंचन नहीं हो पाया। टैब सिस्टम से तेल की सुविधा थी। तेल के बिना लालटेन व मशाला जलाना संभव नहीं था। अगले वर्ष कलाकार अख्तर ने किसी प्रकार की मिट्टी के तेल की व्यवस्था कर फोरम का पुन: मंचन किया। कोरोना काल में एक साल भी फोरम का मंचन नहीं मिला। श्रीराम सेवा समिति मैलीहाट के अध्यक्ष भगवत शरण राय कहते हैं कि फर्मा को लेकर आज भी पहले इसी तरह का उत्साह देखिए।





