राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघ चालक डा. मोहन भागवत ने कहा कि जीवन में शिक्षा का अत्यधिक महत्व है। शिक्षा ही वह माध्यम है जो व्यक्ति और समाज को मजबूत बनाती है। बिना शिक्षा के समृद्धि और संपूर्णता नहीं आ सकती। शिक्षा को परिश्रम का साथ मिले तो सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है। स्वावलंबन का रास्ता भी शिक्षा और परिश्रम के रास्ते से होकर गुजरता है। पिथौरागढ़ के मुवानी में शेर सिंह कार्की सरस्वती विहार विद्यालय भवन के उद्घाटन पर संघ प्रमुख भागवत ने यह बात कही।
10 प्रतिशत से अधिक नौकरी संभव नहीं
संघ प्रमुख भागवत ने कहा विश्व का कोई भी 10 प्रतिशत से अधिक नौकरी नहीं दे सकता है। हमें शिक्षा का स्वरूप ऐसा बनाना होगा जिससे हर नागरिक कुछ करने के लिए प्रेरित हो। वह ऐसा कर्म करे जिससे स्वावलंबी बने और समाज उसके कार्य को स्वीकार्यता दे। भागवत ने भारत के अतीत को वैभवशाली बताया और कहा भारत हमेशा वैभवशाली रहेगा।
अपने भविष्य के लिए फिक्रमंद रहें
समारोह को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा मनुष्य को जीवन जीने के लिए सुख, समृद्धि चाहिए। व्यक्ति अपने हाथों से ही अपना भविष्य तय करता है। इसके लिए प्रयास आवश्यक हैं। संपूर्ण शिक्षा की आवश्यकता है, जिससे स्वावलंबन पैदा हो। हर व्यक्ति को अपने भविष्य के लिए चिंतित होना चाहिए।
शिक्षा वही जो ज्ञान के साथ संस्कार दे
विद्या भारती की शिक्षा पद्धति पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि शिक्षा वही है जो ज्ञान और संस्कार देती है। शास्त्रों में इसका उल्लेख है। भागवत ने हिमालय की भूमि को तपोभूमि, ऋषि, मुनियों की भूमि बताया। तपस्या के महत्व पर कहानी सुनाते हुए कहा कि तपस्वी के तप का फल तपस्वी से अधिक अन्य लोगों को मिलता है। समारोह में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति ओपीएस नेगी, पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, केंद्रीय परिवहन राज्य मंत्री अजय टम्टाभी शामिल रहे।





