बाल दिवस पर स्कूल टूर पर गई 12वीं की छात्रा घर लौटी तो वह कफ़न से लिपटी थी। सुबह उत्साहित होकर साथियों के साथ पिकनिक मनाने निकली बेटी का शव देखकर मां बेहोश हो गई। इस घटना ने हर मां-बाप को चिंतित कर दिया है। यह मामला हल्द्वानी का है।
पिता बोले बेटी की हत्या हुई
मुखानी थाना क्षेत्र के अंतर्गत नैनी व्यू कॉलोनी निवासी अंजलि केवीएम स्कूल में 12वीं की छात्रा थी। बाल दिवस पर स्कूल के बच्चों का एक टूर बरेली पर गया था। कुछ देर बाद ही अंजलि की मौत की खबर आई। अंजलि की मौत ने केवीएम स्कूल प्रबंधन को बुरी तरह घेर दिया है। पिता राजेंद्र सिंह रावत ने थाने में तहरीर देकर स्कूल प्रबंधन पर हत्या का आरोप लगाया है। पिता ने पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब उनकी कॉलोनी के लोगों ने विरोध किया तो स्कूल वाले अंजलि का शव एंबुलेंस में छोड़कर भाग गए।
सुबह सात बजे रवाना हुआ था टूर
हीरानगर स्थित केवीएम स्कूल से गुरुवार सुबह सात बजे टूर रवाना हुआ। करीब 11 बजे घटना हो गई। पूरे दिन स्कूल प्रबंधन और पुलिस की तरफ से बचाव वाले बयान आते रहे। शाम छह बजे पिता राजेंद्र सिंह रावत के शाहजहांपुर से हल्द्वानी पहुंच गए। पिता ने जब मृत बेटी का चेहरा देखा तो वह गुस्सा गए और कार्रवाई की ठान ली। पिता के तहरीर देने के बाद पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए ले गई।
मेरी बेटी को कोई बीमारी नहीं थी: पिता
पिता ने लिखा है कि उनकी बेटी का किसी प्रकार की बीमारी नहीं थी। सवा 12 बजे उनकी पत्नी सरिता को एक टीचर ने खबर देकर बताया कि उनकी बेटी बेहोश हो गई। पत्नी ने इलाज कराने को कहा। बाद में उसी टीचर से पिता ने बात की तो बताया कि डॉक्टर को दिखा दिया है, अंजलि को हम वापस घर लेकर आ रहे हैं। फिर वे लोग एंबुलेंस से अंजलि का शव लेकर घर पहुंचे। तब तक नहीं बताया कि अंजलि की मौत हो गई है।
मां को कराना पड़ा भर्ती
बेटी का शव देखकर मां सरिता रावत की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। नैनी व्यू कॉलोनी के लोगों ने विरोध किया तो स्कूल वाले शव एंबुलेंस में ही छोड़कर भाग गए। मामला संदिग्ध लगने के कारण पिता के लौटने का इंतजार किया गया।
पुलिस और अस्पताल के बयान अलग
बरेली के इज्जतनगर थाने के प्रभारी धनंजय पांडे के मुताबिक उन्हें स्कूल वालों ने पहले यह बताया कि अंजलि स्विमिंग पूल के पास खड़ी थी तभी उसे दौरा आया और वह पानी में गिर गई। अमर उजाला में प्रकाशित समाचार के अनुसार अस्पताल वालों ने पुलिस को तो यहां तक बता दिया कि अंजलि की हालत में सुधार होने के बाद स्कूल वाले उसे अपने साथ ले गए।
विद्यालय की ओर से कोई लापरवाही नहीं: प्रधानाचार्य
शाम को स्कूल प्रबंधक मंजुल भंडारी ने कहा कि अंजलि स्लाइडिंग करते हुए पूल में आकर गिरी और फिर उठ न सकी। बाहर निकालने के बाद कपड़े गीले होने के कारण दूसरे कपड़े पहनाए। अंजलि को अस्पताल ले गए। पहले अस्पताल में उसे मृत घोषित किया तो दूसरे अस्पताल मेडिसिटी ले गए। बाहर ही ईसीजी टेस्ट हुआ तो वहां भी उसके जीवित न होने की बात कह दी गई।प्रधानाचार्य कमलेश भंडारी का कहना है कि 13 टीचरों व अन्य स्टाफ की देखरेख में बच्चे भेजे गए थे, स्कूल की तरफ से कोई लापरवाही नहीं हुई।





