कभी कश्मीर की शीतल जलवायु में होने वाली चेरी को चंपावत में उगाने की तैयारी है। उद्यान विभाग ने मुड़ियानी स्थित राजकीय उद्यान नर्सरी में ट्रायल के तौर पर चेरी के 50 मदर प्लांट लगाए हैं। इसके लिए अल्मोड़ा के चौखुटिया से पौधे लाए गए हैं। चौखुटिया में तीन-चार वर्ष पहले से चेरी उगाने पर शोध चल रहा है। मदर प्लांट की बढ़वार अच्छी होने व अच्छा फल लगने पर भविष्य में ग्राफ्टिंग से नए पौधे तैयार होंगे। कश्मीर के बाद अब हिमाचल में अच्छी मात्रा में चेरी उत्पादित हो रही है। पर्वतीय जलवायु की समानता को देखते हुए उत्तराखंड में चेरी उत्पादन की तरफ कदम बढ़ाया गया है।

कई तरह से गुणकारी है चेरी
चेरी का पौधा तीन से पांच वर्ष में फल देता है। फल खट्टा-मीठा होता है। अलग-अलग प्रजाति के पौधे चार से 14 मीटर ऊंचे हाेते हैं। चेरी में कई विटामिन, कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम के साथ एंटीआक्सीडेंट्स जैसे पोषक तत्व होते हैं। स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ चेरी डायबिटीज, गठिया, कैंसर व दिल के रोगों जैसी बीमारियों का खतरा कम करती है।
कीवी को लेकर भी किसानों में उत्साह
चंपावत में कीवी मिशन के तहत कीवी की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। वर्ष 2023 में चंपावत में 3330 किसानों को 19500 पौधे लगाए हैं। खुद उद्यान विभाग ने मुड़ियानी नर्सरी में 266 मातृ पौधे लगाए हैं। बाद में ग्राफ्टिंग से नए पौधे तैयार होंगे। स्थानीय जलवायु में पैदा होने से इसके अधिक सफल होने की संभावना रहेगी। कीवी बेल वर्गीय पौधा है। कीवी मिशन के तहत सरकार 80 प्रतिशत अनुदान देती है। जिला उद्यान अधिकारी टीएन पांडेय कहते हैं कि नर्सरी से जल्द ही प्लांट मिलने लगेंगे। चंपावत, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ की जलवायु कीवी व चेरी उत्पादन के अनुकूल है।





