हल्द्वानी केवीएम स्कूल की छात्रा अंजलि रावत की मौत की वजह सामने आ गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ हुआ है कि अंजलि की मौत पैनिक स्ट्रोक आने से हुई थी। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि पूल में नहाने से पहले स्लाइडिंग के दौरान छात्रा डरी होगी। इससे उसे पैनिक स्ट्रोक आ गया। छात्रा के पेट में पानी पाया गया है। अंजलि का बिसरा सुरक्षित रखा गया है। जिसे फारेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। फिलहाल पूरे प्रकरण में पुलिस की जांच जारी है।
यह था पूरा प्रकरण
मुखानी थानाक्षेत्र के भगवानपुर नैनी व्यू कालोनी निवासी नायब सुबेदार राजेंद्र रावत की बेटी अंजलि रावत केवीएम स्कूल हीरानगर में कक्षा 12 की छात्रा थी। बाल दिवस पर स्कूल के बच्चों का टूर बरेली फन सिटी भ्रमण के लिए गया था। जहां अंजलि की मौत हो गई थी। स्कूल प्रबंधन छात्रा की लाश लेकर घर पहुंचा था। सुबह हंसी-खुशी भ्रमण पर निकली बेटी का शाम को कफ़न से लिपटा शव देखकर परिवार वाले बिफर पड़े। स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पिता ने पुलिस में तहरीर सौंपी थी।
स्कूल से आए अलग-अलग बयान
स्कूल प्रबंधन का कहना था कि छात्रा गश खाकर पूल में गिरी। फिर बताया कि नहाने के दौरान अंजलि डूब गई थी। घटना के गम और गुस्से के बीच स्कूल प्रबंधन के अलग-अलग बयान से परिवार वालों और अभिभावकों में गुस्सा पनम गया था।
एक्सपर्ट की ली गई मदद
मामला पेचीदा और गंभीर होने की वजह से पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने के लिए डॉक्टरों ने एक्सपर्ट की भी मदद ली। रिपोर्ट में पैनिक स्ट्रोक से मौत होने की बात सामने आ रही है।
हादसे को इस तरह समझिए
डाक्टरों का कहना है कि अंजलि जब ऊपर से स्लाइडिंग करते हुए नीचे पूल की तरफ आई होगी तब वह डर गई। इतना डरी की उसे पैनिक स्ट्रोक पड़ा। इसकी वजह से स्लाइडिंग के बाद पानी में आते ही वह बेहोश हो गई। बच्चे एक-एक कर स्लाइडिंग करते हुए पूल में उतरते जा रहे होंगे। इस बीच सभी उत्साहित, होकर कुछ शोर भी कर रहे होंगे। इस उत्साह और रोमांच में किसी का ध्यान अंजलि की तरफ नहीं गया। जब किसी ने उसे देखा तो तब तक देर हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार अंजलि के पेट में पानी भी मिला है।
क्या है पैनिक स्ट्रोक
इसमें अक्सर शारीरिक लक्षण शामिल होते हैं, जो दिल के दौरे की तरह लग सकते हैं। जैसे कांपना, झुनझुनी या तेज हृदय गति। पैनिक अटैक कभी भी हो सकते हैं। पैनिक डिसआर्डर से पीड़ित व्यक्ति भय के कारण अपने साथ कुछ गलत घटित होने के लिए डरने लगता है। पैनिक स्ट्रोक में आतंक, खलबली या अचानक होने वाली किसी स्थिति में व्यक्ति डर से ग्रसित हो जाता है। डर की अनुभूति इतनी तीव्र होती है कि तर्कपूर्ण सोच नहीं रहती।
पैनिक स्ट्रोक को ऐसे समझें
इसे ऐसे समझिए कि कोई बच्चा बड़ी चरखी (झूले) में बैठा घूम रहा है। और उसे डर की वजह से पैनिंग स्ट्रोक पड़ा तो वह अपने को बचाने के लिए झूले से कूद तक सकता है। उसकी यह सोच-समझ गायब हो जाती है कि झूले से कूदने से भी उसकी मौत हो सकती है या उसे नुकसान पहुंच सकता है। जानकार कहते हैं कि अगर कोई बच्चा किसी चीज से डरता है तो उसे जबरन उसके लिए प्रेरित नहीं करना चाहिए।





