शीतकाल को देखते हुए उत्तराखंड के चारधाम के कपाट बंद हो चुके हैं। वहीं, तीन माह के इंतजार के बाद पाताल भुवनेश्वर गुफा के कपाट फिर खुल गए हैं। पुजारी ने विधि विधान के साथ पूजन करते हुए रविवार को मंदिर के कपाट खोले।
ऑक्सीजन का स्तर कम होने की वजह से मानसून अवधि में पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट स्थित पाताल भुवनेश्वर गुफा के दर्शन प्रतिबंधित कर दिए गए थे। बताया जा रहा है कि अब ऑक्सीजन की स्थिति ठीक है। गुफा के द्वार को फूल मालाओं से सजाया गया है। मंदिर समिति के अध्यक्ष नीलम भंडारी ने बताया कि एहतियात के तौर पर तीन आक्सीजन सिलिंडर खरीदे गए हैं। इनमें एक गुफा के भीतर रखा गया है और दो परिसर में हैं। जरूरत पड़ने पर श्रद्धालुओं को ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे।
आसानी से कर सकेंगे दर्शन
अगस्त में आक्सीजन कम होने पर पाताल भुवनेश्वर गुफा को बंद कर दिया गया था। श्रद्धालुओं को यहां आने की अनुमति नहीं थी। बताते हैं कि वर्षा काल में नमी बढ़ने की वजह से गुफा के भीतर ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है। कार्बनडाइ आक्साइड व अन्य गैसों का प्राकृतिक उत्सर्जन होने लगता है। इसी वजह से गुफा को तीन माह के लिए बंद रखा जाता है। रविवार 24 नवंबर को कपाट खोलने के साथ श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।
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इस तरह पहुंचे पाताल भुवनेश्वर
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर गुफा तक पहुंचाने के लिए आपको हल्द्वानी या टनकपुर रेलवे स्टेशन पहुंचना होता है। दोनों स्थानों के लिए बस सेवा भी उपलब्ध है। प्रदेश सरकार की पहल से वर्तमान में देहरादून से पिथौरागढ़ के नैनी सैनी के लिए विमान सेवा भी उपलब्ध है। पंतनगर एयरपोर्ट के लिए नियमित उड़ान जारी रहती है। टनकपुर से चंपावत, घाट होते हुए, जबकि काठगोदाम से अल्मोड़ा, दन्या, पनार होते हुए गंगोलीहाट के नजदीक स्थित पाताल भुवनेश्वर गुफा तक पहुंचा जा सकता है। दोनों ही रूट पर कुमाऊं मंडल विकास निगम के पर्यटक आवास गृह के अलावा होम स्टे, निजी होटल आदि उपलब्ध हैं।





