नगर निकायों का कार्यकाल पिछले साल दो दिसंबर को समाप्त हो गया था। करीब वर्ष बीतने के बाद भी चुनाव के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। दावेदार इंतजार में हैं लेकिन सरकार की तैयारी अब भी पूरी नहीं हो पाई है। फिलहाल अगले एक-दो महीने चुनाव की संभावना कम ही नजर आ रही है।
अध्यादेश को राज्यपाल की स्वीकृति जरूरी
नगर निकायों में ओबीसी आरक्षण का निर्धारण नहीं हो पाया है। कहा जा रहा है कि इसमें कुछ और वक्त लगेगा। इस सिलसिले में नगर पालिका व नगर निगम अधिनियम में संशोधन के दृष्टिगत सरकार अध्यादेश ला रही है, जिस पर राजभवन की स्वीकृति का इंतजार है।
102 निकायों में होना है चुनाव
प्रदेश में क्रियाशील नगर निकायों की संख्या 105 है। बदरीनाथ, केदारनाथ व गंगोत्री में चुनाव नहीं होते। शेष 102 निकायों में चुनाव को देखते हुए परिसीमन, निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण और मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण कार्य हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार निकायों में ओबीसी के लिए आरक्षण का नए सिरे से निर्धारण होना है। इस संबंध में गठित एकल समर्पित आयोग अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप चुका है।
पूर्व में अध्यादेश ला चुकी सरकार
ओबीसी आरक्षण निर्धारण के लिए सरकार पूर्व में अध्यादेश के माध्यम से निकाय अधिनियम में संशोधन किया था। अध्यादेश विधेयक के रूप में विधानसभा के सत्र में रखा गया तो नगर निगम अधिनियम पारित नहीं हो पाया। फिर यह प्रकरण विधानसभा की प्रवर समिति को गया। समिति 2011 की जनगणना के आधार पर निकाय चुनाव कराने का सुझाव दिया।
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ओबीसी आरक्षण होना है तय
सरकार ने ओबीसी आरक्षण निर्धारण के दृष्टिगत फिर से निकाय अधिनियम में संशोधन अध्यादेश राजभवन भेजा। केदारनाथ उपचुनाव की आचार संहिता के चलते प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। राज्यपाल की स्वीकृति मिलती है तो इसके बाद आरक्षण नियमावली में संशोधन होगा। दैनिक जागरण में प्रकाशित समाचार के अनुसार राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद भी आरक्षण तय होने, आपत्तियां सुनने और उनके निस्तारण में दो-तीन माह का समय लग सकता है।





