उत्तराखंड स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर एमबीपीजी कालेज के हिंदी विभाग के सेवानिवृत्त प्राध्यापक डा. संतोष मिश्र की पहल रंग लाई है। डा. मिश्र की प्रेरणा से लोग परंपरागत दाह संस्कार के स्वरूप के साथ जल व वायु प्रदूषण से सुरक्षित आधुनिक विद्युत शवदाह गृह को अपनाने आगे आ रहे हैं। हल्द्वानी रानीबाग स्थित विद्युत शवदाह गृह में 318 शव का दाह संस्कार मशीन से किया गया है। इसमें 103 लावारिश व 215 जागरूक परिवारों के प्रियजन हैं। विद्युत शवदाह गृह को हल्द्वानी नगर निगम के हेड आपरेटर महेश पांडे संचालित कर रहे हैं।
10 वर्ष के इंतजार के बाद बन पाया शवदाह गृह
विद्युत शवदाह गृह के लिए 2014 में बजट जारी हुआ था। तकनीकी और प्राकृतिक अड़चनों के कारण लगभग 10 वर्षों के बाद बाद यह बनकर तैयार हो गया। सात जनवरी 2024 को विद्युत शवदाह गृह का उद्घाटन हुआ। रानीबाग में हल्द्वानी, कालाढूंगी, हल्दूचौड़, लालकुआं, भीमताल और आसपास के लोग दाह संस्कार के लिए आते हैं। चौमास में दाह संस्कार में कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पहाड़ से उतरे जल सैलाब के कारण गौला उफान पर आ जाती है, घाट पानी, कीचड़ में डूब जाते हैं और लकड़ियां गीली हो जाती हैं। विवशता में लोग पुराने टायरों और डीजल से शवों का दाह संस्कार करते हैं। ऐसे शवदाह से पानी और भी प्रदूषित हो जाता है और इसी पानी को हल्द्वानी के लोग पीते हैं।
पर्यावरण-समाज हित में निर्णय लेने की समझ का नतीजा: मिश्र
रोटरी क्लब और स्थानीय नागरिकों ने जन समाधान कैम्प में नदी में प्रदूषण की शिकायत दर्ज कराई थी। इन सभी का संज्ञान लेकर हाल ही में जिलाधिकारी वंदना सिंह ने अपनी टीम के साथ विद्युत शवदाह गृह, रानीबाग का निरीक्षण किया। उन्होंने नगर निगम को व्यवस्थाएं ठीक करने के लिए निर्देश दिए। डीएम ने जागरूक लोगों से आगे आने का आह्वान किया। अपनी कार्यशैली से सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जगाने वाले शिक्षाविद् डा. संतोष मिश्र ने खुद प्रतीकात्मक कफन ओढ़कर समाज से अपने प्रियजनों की अंत्येष्टि विद्युत शवदाह गृह में कराने पर विचार करने की अपील की। डा. मिश्र कहते हैं 215 परिवारों ने सिद्ध किया है कि वह सामाजिक वंदिशों को पीछे छोड़कर पर्यावरण व समाज हित में निर्णय लेने की क्षमता व समझ रखते हैं।





