भाकपा माले ने स्मार्ट मीटर योजना वापस लेने, यूपीसीएल के निजीकरण की कोशिश बंद करने, बिजली दरों में किसी भी तरह की वृद्धि न करने और विद्युत बिलों में मीटर रीडिंग के अतिरिक्त लगाए जाने वाले फिक्स चार्ज को समाप्त करने की मांग उठाई है। राज्यव्यापी प्रदर्शन के तहत भाकपा माले और किसान महासभा के कार्यकर्ताओं ने हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में धरना प्रदर्शन कर विरोध जताया। बाद में नगर मजिस्ट्रेट कार्यालय तक जुलूस निकाला। सीएम के नाम पांच सूत्रीय मांग पत्र भेजा है।
भाकपा माले नैनीताल जिला सचिव डा. कैलाश पांडेय ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि, धामी सरकार बिजली के स्मार्ट मीटर लगा रही है। जिसे पहले प्रीपेड मीटर के नाम से लगाने की योजना थी। भारी जनविरोध के बाद प्रीपेड मीटर योजना का नाम बदलकर स्मार्ट मीटर योजना कर दिया गया। पहले ही डिजिटल मीटर पूरे प्रदेश में लगे हुए हैं तब ये स्मार्ट नामधारी नए मीटर लगाए जाने की आवश्यकता समझ से परे है। बिजली चोरी रोकने का तर्क देकर जो स्मार्ट मीटर लगाए जाने की योजना बनाई गई है वह केवल भरमाने की कोशिश है, क्योंकि जो भी लोग पहले से ही मीटर लगाए हुए हैं वे बदस्तूर बिजली बिल जमा करते हैं। ऐसे में इसके पीछे यूपीसीएल के निजीकरण और भविष्य में मीटरों को प्रीपेड बनाने की साजिश की जा रही है। जिसका वह पुरजोर विरोध करते हैं।
प्रदेश का उपक्रम जाने के साथ नौकरी का भी खतरा
पांडेय ने कहा जिस तरह से स्मार्ट मीटर लगाने का काम प्रधानमंत्री मोदी के प्रिय पूंजीपति गौतम अडानी को दिया गया है उससे सरकार की मंशा और भी साफ हो गई है। इसके जरिए कुल मिलाकर सरकार यूपीसीएल (उत्तराखण्ड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड) का निजीकरण और बिजली के दामों में भारी बढ़ोत्तरी करना चाहती है। यूपीसीएल को अडानी के हवाले करना चाहती है, यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं हो सकता है। स्मार्ट मीटर लगाने की नीति जनता के खिलाफ होने के साथ विद्युत विभाग के कर्मचारियों के लिए भी खतरे की घंटी है। स्मार्ट मीटर लगाने से भारी पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी होगी, पहले से ही ठेके पर काम कर रहे कर्मियों की नौकरियों पर गाज गिरना लाजमी है। जिससे पहले से भयानक हो रही बेरोजगारी में और वृद्धि होगी।
जनता पर पहले ही बिजली बिल का भारी बोझ: उर्मिला
किसान महासभा बागजाला की अध्यक्ष उर्मिला रैस्वाल ने कहा कि, भाजपा सरकार पहले ही कई कई बार बिजली दरों में वृद्धि करके आम जनता के लिए मुश्किलें खड़ी की गई हैं। अब सरकार स्मार्ट बिजली मीटर लगाने की योजना पर काम कर उनकी मुश्किलों को बढ़ाने का काम कर रही है। राज्य सरकार की यह नीति का विरोध करते हैं। यहां प्रकाश फुलोरिया, वेद प्रकाश, पंकज चौहान, मो. यासीन, मीना भट्ट, मोहन लाल आर्य, नफीस अहमद खान, मीना भट्ट, नारायण दत्त जोशी, विमला देवी, हरक सिंह बिष्ट, चंदन मटियाली, नंदी देवी, चंपा देवी, तुलसी देवी, इमरान, कमल नौला, शाहनवाज, लक्ष्मी आदि मुख्य रूप से शामिल रहे।
भाकपा माले की पांच सूत्रीय मांगें
-राज्य में विद्युत के स्मार्ट मीटर लगाने की योजना वापस ली जाए और बिजली मीटरों की पुरानी पद्धति जारी रखी जाए।
-यूपीसीएल के निजीकरण- ठेकाकरण की कोई भी कोशिश बंद की जाय।
-लगातार जारी लो-वोल्टेज की समस्या और उसके बावजूद बिजली बिलों में भारी बढ़ोत्तरी पर रोक लगाई जाए।
-बिजली दरों में किसी भी तरह की वृद्धि न की जाए।
-विद्युत बिलों में मीटर रीडिंग के अतिरिक्त लगाए जाने वाले फिक्स चार्ज को समाप्त किया जाय।





