नवजात शिशु में जेनेटिक डिसआर्डर का पता नहीं लगाने पर प्रसव पूर्व देखरेख, जांच करने वाले चार डाक्टरों के विरुद्ध प्राथमिकी हुई है। मामला केरल का है। विकार के साथ जन्मे माता-पिता की तहरीर के आधार पर पुलिस ने सरकारी महिला एवं बाल अस्पताल की दो महिला चिकित्सक और निजी जांच प्रयोगशाला के दो डाक्टरों पर मुकदमा किया है। जेनेटिक डिसआर्डर के साथ जन्मने पर डॉक्टरों पर मुकदमा होने का यह पहला मामला बताया जा रहा है। अलप्पुझा निवासी अनीश और सुरुमी का आरोप है कि प्रसव पूर्व जांच के दौरान डाक्टर आनुवंशिक विकृतियों का पता लगाने में विफल रहे। डाक्टरों ने उन्हें बताया की रिपोर्ट सामान्य है। दंपती ने कहना है कि उन्हें प्रसव के चार दिन बाद बच्चा दिखाया गया।
सर्जरी से हुआ प्रसव
सुरुमी को प्रसव के लिए कडप्पुरम महिला एवं बाल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। भ्रूण की हरकत और धड़कन नहीं होने का हवाला देते हुए उसे अलप्पुझा के वंदनम में सरकारी मेडिकल कालेज अस्पताल (एमसीएच) रेफर किया गया। एमसीएच में आठ नवंबर को सर्जरी के बाद बच्चे का जन्म हुआ। बच्चे में गंभीर आंतरिक और बाहरी विकृतियां पाई गईं।
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क्या कहते हैं आरोपी डॉक्टर
प्रतिक्रिया देते हुए एक आरोपित डाक्टर ने कहा कि उन्होंने सुरुमी का गर्भावस्था के शुरुआती तीन माह के दौरान उसकी देखभाल की थी। मुझे दिखाई गई रिपोर्ट में भ्रूण के विकास में समस्याएं बताई गई थीं। जांच प्रयोगशाला से जुड़े चिकित्सकों ने कहा कि रिपोर्ट में कोई गलती नहीं थी।
इन धाराओं में हुई प्राथमिकी
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 125 (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालना), 125 (बी) (गंभीर चोट पहुंचाना) के तहत मामला दर्ज किया है। कोर्ट में अगर आरोप सिद्ध होता है तो डाक्टरों को तीन वर्ष की जेल या 10 हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं।






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