सरकारी सेवारत पत्नी को पति के मकान में रहने का अधिकार, कोर्ट ने प्रकरण को घरेलू हिंसा नहीं माना

अपराध/दुर्घटना

घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत प्रस्तुत वाद में पीड़िता व उसके दो बच्चों को पति के बाराकोट के फरतोला गांव स्थित मकान में रहने का निर्णय सुनाया है। चंपावत के न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने प्रार्थनापत्र को आंशिक रूप से स्वीकारते हुए कहा पति महिला को रहने में किसी तरह की बाधा नहीं डालेगा। हालांकि कोर्ट ने प्रकरण को घरेलू हिंसा मानने से इनकार कर दिया।

सितारगंज रह रहीं रचना वर्मा ने कहा था कि 2001 में उसकी शादी अनिल वर्मा से हुई थी। पति उसका मानसिक उत्पीड़न करता है। दो बेटों को अपना नहीं मानता। खटीमा में मकान होते हुए उसे सितारगंज में किराये के घर में रहना पड़ रहा है। पति बच्चों के प्रमाणपत्र नहीं बनने दे रहा। ऐसे में वह पति के साथ नहीं रहना चाहती। पति ने कोर्ट में कहा उसकी पत्नी कभी भी उसके गांव नहीं रही। शादी खटीमा में हुई थी। 2019 तक खटीमा में रहने के बाद वह सितारंगज चली गई। वह सितारगंज में सरकारी विद्यालय में शिक्षिका है। पति ने खुद की बेरोजगारी का उल्लेख करते हुए कहा कि पत्नी अपनी दीदी व जीजा की दखल से उस पर दबाव बनाती है। खटीमा में जिस घर का हिस्सा वह मांगती है वह उसका न होकर उसके बड़े भाई के हिस्से आता है। साक्ष्यों व गवाहों को सुनने के बाद जहां आरा अंसारी की कोर्ट ने कहा घरेलू हिंसा का मामला नहीं बनता। हालांकि पत्नी को मूल आवास में रहने का अधिकार दिया जाता है।

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