उत्तराखंड में जंगली जानवरों का आतंक लगातार बढ़ते जा रहा है। पर्वतीय इलाकों में बंदर, लंगूर और मैदानी क्षेत्र हाथी किसानों की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं। किसान अपने खेतों के आस-पास कैमोमाइल फूल लगाएं तो जंगली जानवरों के आतंक से काफी हद तक निजात मिल सकती है। इस फूल में विभिन्न प्रकार के केमिकल की गंध होती है, जिससे जंगली जानवर इससे दूर रहना चाहते हैं।
लोहाघाट कृषि विज्ञान केंद्र की उद्यान विज्ञानी डा. रजनी पंत बतातीं हैं कि किसान अपने खेतों की मेड़ अथवा खेतों के किनारे कैमोमाइल फूल लगाएं तो जंगली जानवरों के आतंक से काफी हद तक निजात पाई जा सकती है। उत्तराखंड में कई जगह किसान इस फूल का उपयोग कर रहे हैं। चंपावत में जानकारी कम होने से कैमोमाइल फूल का उपयोग नहीं हो पा रहा है।

विशेष तरह का फूल है कैमोमाइल

डा रजनी बतातीं हैं, कैमोमाइल विशेष प्रकार का फूल है, जिसे जड़ी बूटी की श्रेणी में शामिल किया गया है। इसका वैज्ञानिक नाम मैट्रिकेरिया चैमोमिल्ला है। यह गर्मी वाले स्थानों पर ज्यादा पैदा होता है। कैमोमाइल से चाय भी बनाई जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद है। कैमोमाइल अधिकतर गर्म इलाकों में होता है, लेकिन मौसम चक्र में बदलाव के कारण यह पर्वतीय इलाकों में भी खूब उग रहा है। इसकी गंध से जंगली जानवर दूर भागते हैं। अधिक से अधिक किसानों को बीज उपलब्ध कराकर इसका रोपण करवाया जाए तो जंगली जानवरों की समस्या काफी कम की जा सकती है।

वर्ष में दो बार लगते हैं पौधे
इसके पौधे अप्रैल और अक्टूबर माह में लगाए जाते हैं। डा. पंत ने बताया कि पिछले वर्ष कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से किसानों को कैमोमाइल फूल की उपयोगिता की जानकारी दी गई थी। जिसके बाद कुछ किसानों ने इस फूल को खेतों के चारों ओर लगाया। इस बार भी प्रयोग के तौर पर कुछ किसानों ने इसका उपयोग किया। जिसके सार्थक परिणाम देखने में आए हैं।

तिमूर, गुलाब की बाड़ भी कारगर
विज्ञानी डा. रजनी पंत ने बताया कि जंगलों में भोजन के अभाव और भोजन की तलाश में जंगली जानवर किसानों के खेतों तक पहुंच जाते हैं। इन जानवरों से अपनी फसलों को बचाने के लिए किसान इलेक्ट्रिक तार की बाड़ या झटका मशीन का इस्तेमाल कर सकते हैं। एक एकड़ में तार-बाढ़ लगाने पर लगभग दस से बारह हजार तक का खर्चा आ जाता है। यदि किसान झटका मशीन नहीं लगा सकते तो कंटीले फलों, फूलों और औषधीय पौधों को खेतों के किनारे बाड़ के रूप में लगा सकते हैं। कंटीले फूलों में गुलाब को भी लगाया जा सकता है। गुलाब के फूलों से जल या सीधे फूलों को बेचकर किसान अपनी आय भी बढ़ा सकते हैं।

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