एक वर्ष से अधिक इंतजार के बाद राज्य सरकार निकाय चुनाव कराने की दहलीज पर पहुंची है। कुछ दिन पहले ही निकायों में आरक्षण की अधिसूचना जारी हुई है। इधर, नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि बताया जाए कि पंचायत चुनाव कब कराने की मंशा है। जिला पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान प्रतिनिधियों को ही प्रशासन नियुक्त करने के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने जवाब मांगा है। सरकार को दो सप्ताह में शपथपत्र देकर कोर्ट को अवगत कराने को कहा है।
मंगलवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ में नैनीताल के पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष तारा सिंह नेगी व ऊधमसिंह नगर की पूर्व जिला पंचायत सदस्य सुमन सिंह ने याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में कहा गया है कि सरकार ने 30 नवंबर को हरिद्वार को छोड़कर शेष 12 जिलों में जिला पंचायत अध्यक्षों को पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद प्रशासक नियुक्त कर संविधान के अनुच्छेद-243 का उल्लंघन किया है। अनुच्छेद के अनुसार पंचायतों का कार्यकाल पूरा करने से पहले ही चुनाव प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
पूर्व में प्रशासक कार्यकाल को अवैध ठहरा चुकी कोर्ट
याचिकाकर्ता का कहना था कि 2010 में राज्य के मुख्य सचिव की ओर से हाई कोर्ट में शपथपत्र दिया गया था कि पंचायतों में कुछेक में ही प्रशासक नियुक्त किए जाएंगे, थोक के हिसाब से नहीं। तब न्यायालय ने जिला पंचायत में प्रशासक नियुक्त करने को अवैध ठहराया था। 2019 में फिर से पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए तो हाई कोर्ट ने इसे गलत बताया था। ताजा मामले में सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पंचायती राज अधिनियम में प्रशासक की परिभाषा स्पष्ट नहीं की गई है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना की है।
ये भी पढ़ें: बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर बोलीं निर्मला गहतोड़ी, अच्छे दिन की तरह आदर्श चंपावत भी जुमला





