राज्य स्थापना दिवस पर नैनीताल हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने उत्तराखंड की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर तंज किया। प्रश्न करते हुए कहा पहाड़ के गांव-गांव में हर व्यक्ति ने राज्य आंदोलन में भागीदारी की। अपनापन झलकाने को राज्य आंदोलन की लड़ाई लड़ी।
राज्य आंदोलन के दौरान जो सपने देखें, 24 साल बाद भी साकार नहीं हो पाए हैं। प्रश्न किया क्या 24 साल बाद सपनों का उत्तराखंड बन सका है। उन्होंने कहा पहाड़ की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीरता से काम नहीं किया गया। घर-घर चिकित्सा सेवाएं नहीं पहुंची। पर्यटन और होम स्टे के सहारे प्रदेश की तरक्की नहीं हो सकती।बतौर मुख्य अतिथि समारोह को संबोधित करते जस्टिस धूलिया ने युवा अधिवक्ताओं से मेहनत करने, नियमित तौर पर किताबें पढ़ने, पेशे के साथ न्याय करने, विनम्र बनने, दूसरों की सुनने की प्रवृत्ति अपनाने की सीख दी। जस्टिस रवींद्र मैठाणी ने पर्यावरण, पलायन, वीरान गांवों के साथ भू-कानून का उल्लेख किया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी, जस्टिस पंकज पुरोहित, महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर, उत्तराखंड बार काउंसिल के चेयरमैन महेंद्र पाल ने विचार रखे।




