उत्तराखंड अपनी स्थापना के रजत जयंती वर्ष में पहुंच गया है। इस सफर में सीमांत चंपावत ने आधारभूत संरचना के क्षेत्र में जरूर कुछ कदम बढ़ाए हैं लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं दूर तक नजर नहीं आती। सीएम पुष्कर धामी ने चंपावत का नेतृत्व कर जरूर कुछ उम्मीद जगाई है। धामी का नेतृत्व सीमांत जिले को तरक्की की राह पर कितना आगे लेकर जाता है इसका आकलन आने वाली वर्षों में हो सकेगा।
शुरुआत से ही उपेक्षित रहा सीमांत
विषम भौगोलिक परिस्थिति के अनुरूप योजनाएं तैयार न होने से चंपावत जिले का समग्र विकास नहीं हुआ। नीतिकारों और जनप्रतिनिधियों की दृढ़ इच्छा शक्ति के अभाव में जिला विकास के पथ पर खास प्रगति नहीं कर पाया। दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सा, शिक्षा, पेयजल, बिजली, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। दर्जनों दूरस्थ गांवों में संचार सुविधा नहीं पहुंच पाई है। जंगली जानवरों के आतंक से निजात दिलाने और खेती को सुरक्षित करने की दिशा में भी कुछ नहीं हो पाया है।
क्या साकार होगा आदर्श चंपावत का नारा
सीएम पुष्कर धामी ने चंपावत को आदर्श बनाने का संकल्प लिया है। यह स्लोगन खूब प्रचारित हो रहा है। धामी की मंशा है पर्यटन विकास, तीर्थाटन, कृषि, पशुपालन, बागवानी के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ाया जाए। पिछले दो वर्षों में सेब के 100 बागान विकसित हुए हैं। बनबसा, टनकपुर में मिनी सिडकुल स्थापित होना है। संचार सेवा के लिए 18 स्थानों में बीएसएनएल टावर स्थापित हो रहे हैं। यूकास्ट के माध्यम से कई योजनाएं बन रही हैं। धन भी जारी हो रहा है। उम्मीद बंध रही है कि दो-तीन वर्षों में योजनाओं आकर लेकर अपने उद्देश्य में सफल होंगी।
सीएम धामी के समय हुए मुख्य काम
- चंपावत को एसएसजे परिसर की मान्यता
- टनकपुर में आइएसबीटी निर्माणाधीन
- प्रमुख मंदिरों को मानसखंड कारीडोर रूप में विकास
- चंपावत में जिम कार्बेट ट्रेल निर्माणाधीन
- चार मल्टीस्टोरी पार्किंग का निर्माण
- चंपावत में साइसं सेंटर निर्माणाधीन
- लोहाघाट के लिए सरयू लिफ्ट पेयजल योजना को मंजूरी
ये भी चिंता के विषय
डेढ़ दशक में खेती का दायरा 25 प्रतिशत घटा
अधिसंख्य जनसंख्या खेती में संलग्न है, लेकिन उपज कम हो रही। खेती का दायरा घट रहा है। जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक व शिक्षा-रोजगार के लिए नगरों की तरफ बढ़ते पलायन की वजह से खेती सिमट रही है। 2009-10 में रबी में 8,148 हेक्टेयर में खाद्यान्न की पैदावार होती थी, 2022-23 में 20 प्रतिशत कम होकर 6,463 हेक्टेयर रह गई। उत्पादन 9,815 मीट्रिक टन से घटकर 9,488 मीट्रिक टन रह गया। उत्पादन 3.3 प्रतिशत घटा है। खरीफ में 2010-11 में बुआई क्षेत्रफल 14,878 हेक्टेयर व उत्पादन 17,382 मीट्रिक टन था। 2022-23 में क्षेत्रफल 9,372 हेक्टेयर व उत्पादन 14,680 मीट्रिक टन रह गया। इस तरह क्षेत्रफल 37 प्रतिशत व उत्पादन 15.5 प्रतिशत कम हो गया।
54 सरकारी स्कूलों पर लटके ताले
घटती छात्र संख्या से हर साल औसतन दो से अधिक सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं। राज्य गठन के बाद 54 स्कूलों का अस्तित्व समाप्त हो गया। 46 प्राथमिक व आठ उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। 2001 में एक, 2007 से 2010 तक प्रतिवर्ष एक-एक विद्यालय बंद हुआ। 2012 व 2014 में तीन, 2015 में एक साथ पांच विद्यालय बंद हुए। 2017 में सात, 2018 में 12, 2019 में दो, 2021 में तीन, 2022 में सात, 2023 में नौ स्कूलों पर ताले पड़ गए।
