चरस तस्कर मां-बेटे को सात-सात वर्ष की जेल, रात्रि में पैदल जाते पकड़े गए थे अभियुक्त

न्यायालय

धन के लालच के लिए नशे का सौदा करना मां-बेटे को भारी पड़ गया। विशेष सत्र न्यायाधीश ने चरस तस्करी के मामले में दोषी मां-बेटे को सात-सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। उत्तर प्रदेश के बहेड़ी निवासी अभियुक्तों से पांच वर्ष पहले डेढ़ किलो से अधिक चरस बरामद हुई थी। दोषियों पर 50-50 हजार का जुर्माना लगा है। जुर्माना न देने पर छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
चंपावत कोतवाली पुलिस ने नवंबर 2019 में ललुवापानी-बनलेख के बीच गश्त के दौरान शाल ओढ़े महिला व पिट्ठू बैग लटकाए युवक से रात के अंधेरे में पैदल जाने का कारण पूछते हुए रोका। दोनों ठोस जवाब नहीं दे पाए। शक होने पर चेकिंग करने पर महिला से 830 ग्राम व युवक से 750 ग्राम चरस बरामद हुई। दोनों की पहचान 45 वर्षीय रेशमा व 23 वर्षीय जावेद निवासी ग्राम शाहपुरडंडी इस्लामनगर, थाना देवरिया, तहसील बहेड़ी के रूप में हुई। अभियुक्त मां-बेटे हैं। न्यायालय में अभियोजन पक्ष ने पांच गवाह व 29 दस्तावेज प्रस्तुत कर दोनों पर आरोप सिद्ध किया। अनुज कुमार संगल की कोर्ट ने दोनों को एनडीपीएस एक्ट में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

दूसरे मामले में जेल में बंद है जावेद
न्यायाधीश ने दोषी रेशमा को अल्मोड़ा जेल भेजने का निर्णय सुनाया है। अभियुक्त जावेद किसी अन्य प्रकरण में बरेली कारागार में बंद है। उस प्रकरण में जेल से छूटने या जमानत मिलने पर जावेद को अल्मोड़ा जेल भेजा जाएगा। आदेश की प्रति बरेली व अल्मोड़ा कारागार जेल अधीक्षक को दी गई है। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता विद्याधर जोशी ने बताया कि रेशमा पहले चार माह व जावेद नौ माह जेल में रह चुके हैं। उक्त अवधि सजा में समायोजित होगी।

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