कृषि क्षेत्र में किया है कुछ उल्लेखनीय तो पुरस्कार पाने को करें आवेदन, 10 फरवरी हैं अंतिम तिथि

विज्ञान/तकनीक

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) के तहत हर जिले में दो किसान को पुरस्कृत किया जाना है। अगर आप किसान हैं और कृषि के क्षेत्र में नई किस्में विकसित करने, तकनीक का उपयोग, उत्पादन व उत्पादकता बढ़ाने और उत्पाद के सफल विपणन आदि काम किया है तो आप आवेदन कर सकते हैं। पुरस्कृत करने से पहले यह भी देखा जाएगा कि आपने अपनी उपलब्धि का दूसरे किसानों के बीच कितना प्रचार-प्रसार किया है। चंपावत जिले के मुख्य कृषि अधिकारी धनपत कुमार ने बताया कि केंद्र पोषित एनएफएसएम के तहत हर उत्तराखंड के जिले में प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया जाना है। वर्ष 2024-25 में खाद्यान्न उत्पादन में उत्कृष्ट कार्य के लिए दो कृषकों (एक पुरुष व एक महिला) को पुरस्कृत किया जाएगा। पुरस्कार पाने के लिए अपने जिले के कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी कार्यालय में 10 फरवरी तक आवेदनपत्र जमा करना होगा। आवेदन फार्म को कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी कार्यालय, ब्लाक में खंड विकास अधिकारी या जिले में मुख्य कृषि अधिकारी कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं।

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  1. में राजेन्द्र सिंह मेहता, पिथौरागढ( उत्तराखंड ) के सुदूर ग्रामीण
    च्यूरा बाहुल्य क्षेत्र खितोली, पंचेस्वर घाटी में निवास करता हूँ और पेशे से सिविल इंजीनियर हूँ, वर्ष 2019 तक प्राइवेट निर्माण कंपनी में सहायक प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर कार्यरत था, लौकडा॓उन के समय पर मैने स्थानीय च्यूरा किसानौं को एकजुट करके च्यूरा का जलौनी लकड़ी एवं चारापत्ती के लिए किए जाने वाले दोहन पर रोक लगाई और साथ-साथ जिला प्रशासन के सहयोग से कुमाऊं च्यूरा औयल को जी.आई.टैग करवाने का काम किया, जिसका जी.आई.नंबर- 650 है और साथ ही लगभग 300 च्यूरा किसानौं को औथराईज यूजर बनवाया जिससे च्यूरा को अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली, वर्तमान समय में च्यूरा का रोपण और संरक्षण भी साथ-साथ चल रहा है . वर्तमान समय में च्यूरा औयल से बिभिन्न प्रकार की औषधियाँ, सौंदर्य का सामान, नहाने के साबुन, मलहम,क्रीम
    ईत्यादि सामान बनाए जा रहे हैं ,जिससे स्थानीय च्यूरा किसानौं को घर में ही रोजगार के अवसर मिल रहे हैं. जिसमें हमारी संस्था ( च्यूरा उत्पादक एवं कल्याण समीति ) महत्वपूर्ण योगदान दे रही है और समय समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करती रहती है ताकि अधिकाधिक च्यूरा किसानौं को रोजगार से संबद्ध किया जा सके.

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