Breaking: हाई कोर्ट ने सीटों के आरक्षण पर 48 घंटे में मांगा जवाब, पांच निकायों में फंस सकता है पेंच

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निकाय चुनाव के लिए जारी प्रचार के बीच हाई कोर्ट ने आरक्षण अधिसूचना को चुनौती देती याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 48 घंटे के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई छह जनवरी को होगी।
शुक्रवार को न्यायाधीश न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने अल्मोड़ा नगर निगम के मेयर पद को ओबीसी के लिए आरक्षित करने, शक्तिगढ़ व गुप्तकाशी नगरपंचायत, धारचूला व उत्तरकाशी नगरपालिका में चेयरमैन पद पर आरक्षण निर्धारण को चुनौती देती अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिका को अल्मोड़ा की पूर्व पालिकाध्यक्ष शोभा जोशी, शक्तिगढ़ के आकास पासवान, अल्मोड़ा के राबिन भंडारी, उत्तरकाशी के सुरेंद्र दत्त नौटियाल, दया साह, प्रेम सिंह, लवी सिंह आदि ने दायर किया है। याचिकाओं में कहा है कि आरक्षण नियमावली 2024 गलत है। आरक्षण निर्धारण में रोस्टर का अनुपालन न करते हुए मानकों का उल्लंघन किया गया है।

आरक्षण का अनुपात गिनाया
सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता चंद्रशेखर रावत ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 243 (टी) के अनुसार निकाय सीटें आरक्षित की गई हैं। नगर पालिका चुनाव के संबंध में संवैधानिक आदेश का पालन करते हुए सभी 45 नगर पालिका परिषदों में जनसंख्या के अनुपात के अनुसार अध्यक्ष की छह सीटें अनुसूचित जाति के उम्मीदवार के लिए आरक्षित की गई हैं। अनुसूचित जनजाति के लिए एक और ओबीसी के उम्मीदवारों के लिए 13 सीटें आरक्षित की हैं। महिलाओं के लिए 15 सीटें आरक्षित हैं। नगरपंचायत अध्यक्ष पद पर अनुसूचित जाति के लिए छह, अनुसूचित जनजाति के लिए एक, ओबीसी के लिए 16 तथा महिलाओं के लिए 16 सीटें आरक्षित हैं। सीटों के रोटेशन के संबंध में संवैधानिक आदेश का पालन किया है।

आयोग के अधिवक्ता ने दिए कई तर्क
राज्य निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता व सीएससी ने यह भी कहा कि अधिसूचना के बाद चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और ऐसे में हाई कोर्ट याचिकाओं को नहीं सुन सकती। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने कहा कि आरक्षण निर्धारण में नियमों की अनदेखी की गई है। सरकार की ओर से आपत्तियों की स्क्रूटनी नहीं की गई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद एकलपीठ ने सरकार से 48 घंटे में शपथपत्र के साथ जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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