वन सेवा नियमावली में संशोधन कर छह वर्ष में पदोन्नति, पुलिस की भांति वर्ष में एक माह अतिरिक्त मानदेय, जोखिम व आवास भत्ता देने समेत अन्य मांगों को लेकर वन बीट व आरक्षी का कार्य बहिष्कार जारी है। सोमवार को कर्मचारियों ने डीएफओ कार्यालय के बाहर धरना देते हुए आवाज बुलंद की। कहा जब तक मांगें मान नहीं ली जाती वह पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। वनाग्नि के दृष्टिकोण से संवेदनशील समय में कार्मिकों की हड़ताल से अधिकारी पशोपेश की स्थिति में हैं।
प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर वन बीट अधिकारी व वन आरक्षी संघ चंपावत के बैनर तले सोमवार को पांचवें दिन भी धरना जारी रहा। जिलाध्यक्ष भूपाल सिंह रावत ने कहा कि वन आरक्षी को अपराध जारी करने, चालान काटने का अधिकार है। इस काम के लिए राजस्व विभाग में एसआइ व पुलिस में एएसआइ पद दिया गया है। दोनों की तर्ज पर वन आरक्षी को एक स्टार दिया जाना चाहिए। महामंत्री हरीश जोशी ने कहा कि राजस्व उप निरीक्षक की भांति वन आरक्षी को दो हजार के स्थान पर 2800 ग्रेड पे मिले। उपाध्यक्ष हेमा जोशी ने कहा कि कर्मचारी अपनी मांग मनाए बगैर पीछे नहीं हटेंगे। धरना देने वालों में रवि कुमार, त्रिलोक जोशी, विनोद प्रकाश, हरीश तिवारी, भुवन भट्ट, पीयूष बिष्ट, जीवन कुमार, राकेश गिरी, श्याम सिंह, बलदेव, अक्षय वर्मा, जानकी, शिल्पी, सुनीता कालाकोटी, गरिमा रावत, हिमानी रावत, गंगा कुंवर आदि शामिल रहे।





