देव दिवाली कार्तिक पूर्णिमा, कुमाऊं की पावन नदियों में स्नान का महत्व बता रहे डॉ. जोशी

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Kartik Purnima 2024 :पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा को देवी-देवता काशी में आकर भगवान शिव की पूजा करते हैं। दीप जलाते हैं। इस वजह से इस दिन देव दीपावली मनाई जाती है। भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध करके देवों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी। इससे खुश होकर देवता गण काशी में दीपावली मनाते हैं।कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान और जरूरतमंदों को दान करने का विधान है। उत्तराखंड में भी कार्तिक पूर्णिमा को श्रद्धा भाव के साथ मनाया जाता है। पंडित रामदत्त ज्योतिर्वित पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 15 नवंबर की सुबह 6:19 बजे से हो रही है। कार्तिक पूर्णिमा के विभिन्न पहलुओं पर बता रहे हैं श्री महादेव गिरी संस्कृत महाविद्यालय हल्द्वानी के प्राचार्य डॉ नवीन चंद्र जोशी।

पवित्र नदियों में स्नान का विधान

Kartik Purnima 2024 Date: कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को कार्तिक पूर्णिमा मनाई जाती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का विधान है। कुमाऊं मंडल में रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट, टनकपुर शारदा घाट, पिथौरागढ़-चंपावत जिले की सीमा पर स्थित रामेश्वर घाट, जागेश्वर में जटागंगा नदी और बागनाथ में सरयू नदी में लोग स्नान करते हैं। शास्त्रों में नदियों को गंगा समान बताया गया है। इसलिए जो लोग हरिद्वार, गया या प्रयागराज जैसे तीर्थ में नहीं जा पाते हैं, वह स्थानीय नदियों में स्नान कर सकते हैं। बुजुर्ग और असमर्थ लोग घर में पानी में गंगाजल मिलकर भी स्नान कर सकते हैं।

शिव और सत्यनारायण की पूजा

कार्तिक पूर्णिमा को व्रत रखकर सत्यनारायण भगवान की पूजा करते हैं। भगवान शिव की पूजा का भी विधान है। कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा कहते हैं, इस दिन देव दीपावली भी मनाते हैं। पूर्णिमा की रात चंद्रमा की पूजा करते हैं और अर्घ्य देते हैं।

उदय व्यापिनी तिथि के अनुसार निर्णय

कुमाऊं में 119 वर्षों से प्रतिष्ठित पंडित रामदत्त ज्योतिर्वित पंचांग के अनुसार 15 नवंबर को सुबह 6:19 बजे से पूर्णिमा की शुरुआत हो रही है जो देर रात 2:58 बजे तक रहेगी। उदय व्यापिनी तिथि के आधार पर कार्तिक पूर्णिमा 15 नवंबर शुक्रवार को मनाई जाएगी। इसी दिन शनि भी मार्गी हो रहे हैं।

जरूरतमंदों को दान देना सर्वोत्तम

कार्तिक पूर्णिमा को स्नान के बाद अन्न, वस्त्र, फल आदि का दान करने का विधान है। डॉ नवीन जोशी बताते हैं अपनी सामर्थ्य अनुसार दान दिया जाना चाहिए। दान उसे दें जिसे जरूरत हो। चंद्रमा के शुभ फल की प्राप्ति के लिए चावल, दूध, शक्कर, चांदी, सफेद वस्त्र, सफेद मोती, सफेद चंदन आदि का दान करना चाहिए। बीमार व्यक्ति को दवा दें। गरीब और असहाय लोगों को शीतकाल में उपयोग होने वाली वस्तुएं दान कर सकते हैं।

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