पहाड़ी आर्मी संगठन ने 26 फरवरी को चंपावत गोल्ज्यू मंदिर से पहाड़ी हिंदू सशक्तीकरण अभियान शुरू करने का एलान किया है। हल्द्वानी में हुई प्रेस वार्ता में अभियान संयोजक विनोद शाही ने कहा कि यात्रा का पहला चरण कुमाऊं मंडल में चलेगा। 26 फरवरी से शुरू होने वाला अभियान चार मार्च तक चलेगा।
अभियान का शुभारंभ स्थल सीएम पुष्कर धामी के निर्वाचन क्षेत्र और महान आंदोलनकारी काली कुमाऊं का बब्बर शेर कालू महर के जन्मस्थली को रखा गया है। सात दिवसीय यात्रा सात संकल्पों के साथ होगी चंपावत व लोहाघाट होते हुए पिथौरागढ़, मुवानी, थल, कांडा होते हुए एक मार्च को यात्रा बागनाथ की नगरी पहुंचेगी। दो मार्च को गरुड़, कौसानी, सोमेश्वर होते हुए सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा, तीन मार्च को द्वाराहाट, चौखुटिया, मासी, भिकियासैंण, भतरौजखान और चार मार्च को नैनीताल, भवाली, भीमताल होते हुए यात्रा हल्द्वानी पहुंचेगी।
राज्य निर्माण के 25 वर्ष बाद भी पर्वतीय समाज उपेक्षित: रावत
पहाड़ी आर्मी संगठन के संस्थापक अध्यक्ष हरीश रावत ने कहा कि राजनेताओं और सरकारों की उपेक्षा के कारण पृथक राज्य निर्माण के 25 वर्षों के बाद उत्तराखंड की विशिष्ट पहाड़ी हिंदू संस्कृति के वाहक पर्वतीय समाज का सशक्तीकरण नहीं हो पाया है। संगठन पहाड़ी हिंदू समाज के परिवारों एवं लड़के-लड़कियों को हर प्रकार से जागृत, सुरक्षित एवं सशक्त करने का काम करेगा। अभियान के माध्यम से पहाड़ी हिंदू समाज के सभी सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक विषयों पर कार्य करते व्यक्ति एवं संगठनों से संपर्क किया गया है जिनका अभियान को बड़े स्तर का समर्थन मिल रहा यात्रा भव्य और दिव्य होने जा रही है। यहां युवा जिला अध्यक्ष मोहित राणा, कोषाध्यक्ष भगवंत सिंह राणा, मीडिया प्रभारी गौरव गोस्वामी, युवा नगर अध्यक्ष विनोद शाही, मोहन कांडपाल, पंकज जोशी, हिमांशु शर्मा, पंकज बिष्ट, कपिल शाह, बंटी जोशी आदि मौजूद रहे।
यात्रा के मुख्य बिंदु
1. पहाड़ी हिंदू समाज की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित करना
2. आर्थिक अवसरों पर बाहरियों का कब्जा हटाकर हमारे युवाओं को प्रथम अधिकार दिलाना।
3. उत्तराखंड में एनआरसी, भू कानून, मूल निवास, गोमाता को राज्य माता का दर्जा दिलाना।
4. हमारी भाषा और त्योहार को सरकारी मान्यता दिलाना।
5. नदियों, जंगलों और पर्यावरण का अनैतिक एवं अवैध दोहन रोकना।
6. सरकार एवं प्रशासन के स्तर से पहाड़ी क्षेत्र की अनदेखी न होने देना।
7. हमारे बच्चों की शिक्षा और हमारे लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं होने देंगे। नशे से पहाड़ को बचाना।





