कहते हैं बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चंपावत दौरे से यही होता दिखा। नगर पालिका अध्यक्ष के लिए भाजपा प्रत्याशी प्रेमा पांडेय के समर्थन में सभा करने आए सीएम धामी के प्रचार में खास बात यह रही कि उन्होंने किसी भी सभा में बागियों का नाम नहीं लिया। लोहाघाट व चंपावत में आयोजित जनसभा के दौरान धामी ने कांग्रेस पर हमला बोला और भाजपा प्रत्याशियों के जीतने से नगरों के विकास को गति मिलने की बात कही। सीएम धामी के कांग्रेस पर हमलावर होने के दो मायने लगाए जा रहे हैं। एक यह कि वह कांग्रेस को अपने मुकाबले में बताना चाहती हैं। दूसरा यह कि बागियों का नाम न लेकर उन्हें चर्चा में न लाने के रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या है कांग्रेस को मुकाबले में बताने की वजह
जानकार कहते हैं कि कांग्रेस को मुकाबले में बताकर सीएम धामी ने ये अवधारणा बनाने की कोशिश की कि मतदाता इस चुनाव को भाजपा और कांग्रेस के चश्मे से देखें। अगर चुनाव में यह फैक्टर काम करता है तो भाजपा बढ़त बना सकती है। वह इसलिए क्योंकि भाजपा के पास राम मंदिर, हिंदुत्व, सनातन, सर्जिकल स्ट्राइक आदि का मुद्दा है। निश्चित ही अगर यह कार्ड चलता है भाजपा को फायदा मिल सकता है।
निकाय चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दे नहीं रहते प्रभावी
रोचक पहलू यह भी है कि आमतौर पर छोटे चुनाव में राष्ट्रीय स्तर के मुद्दे खास महत्व नहीं रखते हैं। चाहे पंचायती चुनाव हों या फिर नगर निकाय चुनाव, दोनों में मतदाता प्रत्याशी के चेहरे, आपसदारी, कई बार जातीय समीकरण देखता है। परंपरागत वाला यह फैक्टर काम करता है तो भाजपा नुकसान की आशंका से डरी हुई है। भाजपा को डर है कि कहीं उसे नुकसान न उठाना पड़े। इसीलिए वह कांग्रेस को मुकाबले में बताना चाहती है।





