पुलिस गांव-गांव जाकर भांग नष्ट कर रही, फिर भी ‘फूल’ रही चरस

अपराध/दुर्घटना

भांग की खेती को प्रतिबंधित किया गया है। बिना लाइसेंस के कोई भी व्यक्ति भांग की खेती नहीं कर सकता। अगर कोई भांग की खेती करना चाहता है तो इसके लिए बाकायदा लाइसेंस लेने का नियम है। सीमांत चंपावत जिले में केवल दो लोगों के पास ही भांग की खेती का लाइसेंस है। भांग की खेती को नष्ट करने के लिए पुलिस गांव-गांव जाकर अभियान चलाती है। भांग के पौधों को उखाड़ कर तोड़ दिया जाता है। बावजूद इसके चरस की खेती खूब फल-फूल रही है। चरस तस्करी में पकड़े गए अभियुक्त और चरस की बरामद खेप इसकी पुष्टि कर रहे हैं।

वर्ष 2024 में 60 किलो चरस पकड़ी

चंपावत पुलिस के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में नशा तस्करी के 56 मामले प्रकाश में आए। इन मामलों में 82 अभियुक्तों को पकड़ा गया है। कुल मिलाकर 11 माह में 60.5 किलो चरस, 9.5 किलो गांजा बरामद किया गया है। इसके अलावा अफीम और स्मैक भी पहाड़ पहुंच रही है। एक जनवरी से 14 नवंबर 2024 के बीच 1.3 किलो अफीम, 1.2 किलो स्मैक और 840 नशीले इंजेक्शन की खेप पकड़ी गई है।

नशा तस्कर छोड़े नहीं जाएंगे: एसपी

चंपावत पुलिस अधीक्षक अजय गणपति का कहना है कि नशे के अवैध कारोबार के विरुद्ध पुलिस का अभियान जारी रहेगा। सीएम पुष्कर धामी के नशा मुक्त उत्तराखंड के लिए पुलिस निरंतर कार्रवाई कर रही है। इस वर्ष चंपावत पुलिस ने 333 नाली से भांग की खेती को नष्ट किया।

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