मुनस्यारी में फिल्माई गई बुजुर्ग दंपती की मार्मिक प्रेम कहानी पर आधारित फिल्म पायर ‘Pyre’ का प्रीमियर 28वें तेलिन ब्लैक नाइट्स फिल्म फेस्टिवल में होने जा रहा है। खास मौके पर फिल्म के नायक उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के बेरीनाग निवासी पदम सिंह व नायिका हीरा देवी भी विदेश में होंगे। पहली बार कैमरे के सामने अभिनय करने वाले 80 वर्षीय पदम बुबू और हीरा आमा विदेश जाने के लिए उत्साहित हैं। ‘Pyre’ तेलिन फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित होने वाली इकलौती भारतीय फिल्म है। दुनिया भर की 18 फिल्में फेस्टिवल में दिखाई जाएंगी। इस फिल्म को 2025 के अंत तक भारत में रिलीज करने की योजना है।

पलायन से खाली हुए गांव का दर्द
फिल्म निर्माता-निर्देशक विनोद कापड़ी बताते हैं कि ‘पायर’ पलायन से खाली हो चुके मुनस्यारी के एक गांव में रहने वाले दंपती की कहानी है। कहानी की पृष्ठभूमि 80 के दशक की है। फिल्म को पिथौरागढ़ जिले के बेरीनाग में फिल्माया गया है। फिल्म के नायक-नायिका नौजवान नहीं बल्कि 80 वर्ष से अधिक के बुजुर्ग हैं। दोनों आम ग्रामीण हैं। जिन्होंने पहले न कभी अभिनय किया और न सिनेमा के बारे में कुछ जानते हैं।
दोनों ने फिल्म में जान फूंक दी
फिल्म के अभिनेता पदम सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं। नायिका हीरा देवी घरेलू महिला हैं। विनोद कापड़ी कहते हैं कि दोनों कलाकारों ने फिल्म में जान फूंकी है। दोनों के अभिनय से वास्तविकता झलक रही है। कहानी की सजीवता दिखाने में उन्हें ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी। दोनों पहली बार हवाई जहाज से यात्रा करेंगे और पहली बार विदेश जाएंगे। फिल्म का प्रीमियर 19 नवंबर को होना है।
सात वर्ष पुरानी मुलाकात से निकली फिल्म
पायर की कहानी भी गजब है। फिल्म निर्माता विनोद कापड़ी 2017 में मुनस्यारी घूमने आए थे। तब वह बुजुर्ग दंपती से मिले। दोनों की सच्ची कहानी और उनके रिश्ते ने कापड़ी पर गहरा असर डाला। दैनिक हिंदुस्तान में पत्रकार संतोष जोशी फिल्म के सह-निर्माता अशोक पांडे के हवाले लिखते हैं जिस बुजुर्ग दंपती पर फिल्म बनी है, वे जीवन में कभी नजदीकी कस्बे मुनस्यारी तक नहीं गए थे। अशोक पांडे से बातचीत के बाद विनोद कापड़ी बुजुर्ग दंपती से मिले और उनके जीवन पर फिल्म बनाने का निर्णय लिया। फिल्म के लिए गीतकार गुलजार ने मार्मिक गीत लिखा है। बुजुर्ग की कहानी से प्रभावित गुलजार ने कोई फीस लेने से मना कर दिया।
नसीरुद्दीन व रत्ना की जगह बुजुर्ग
फिल्म के लिए पहले नसीरुद्दीन शाह व रत्ना पाठक शाह का चयन किया गया था। नसीरुद्दीन शाह को संशय था कि हिमालय के बाशिंदे के अभिनय को वे मौलिकता दे पाएंगे या नहीं। यह बात उन्होंने कापड़ी से साझा की। इसके बाद रियल कैरेक्टर को अभिनय के लिए चुना गया। गैर अभिनेताओं वाली बुजुर्ग दंपती वाली फिल्म का निर्माण करने को कोई तैयार नहीं था। ऐसे में विनोद कापड़ी ने पत्नी साक्षी जोशी के साथ भागीरथी फिल्म्स के माध्यम से स्वतंत्र रूप से फिल्म निर्माण का निर्णय लिया।

कई पुरस्कार जीत चुके हैं कापड़ी
विनोद कापड़ी पहले टीवी पत्रकार रहे हैं। 2014 में अपनी डाक्यूमेंट्री ‘कैन्ट टेक दिस शिट एनीमोर’ के लिए उन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार जीता। पायर का संगीत ‘माइकल डैना’ ने दिया है। माइकल 2012 में एंग ली की ‘लाइफ ऑफ पाई’ के लिए अकादमी पुरस्कार जीत चुके हैं। विनोद ने 2015 में मिस टनकपुर हाजिर हो और 2018 में ‘पीहू’ फिल्म बनाई है। कोरोना लॉकडाउन के दौरान दिल दहला देने वाली यात्रा के बारे में डाक्यूमेंट्री फिल्म ‘1232 किलोमीटर’ के लिए वाहवाही बटोरने के साथ पुरस्कार जीता था।






