नवंबर का पहला सप्ताह बीत गया है। इस बार अभी तक उस सर्दी का एहसास नहीं हुआ है, जो आमतौर पर नवंबर में महसूस होती है। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र से लेकर मैदानी इलाकों में न्यूनतम तापमान बढ़ा हुआ है। इस बार पोस्ट मानसून वर्षा ने भी निराश किया है। इस कारण पर्वतीय क्षेत्र में गेहूं की बुआई जोर नहीं पकड़ पाई है।
13 वर्ष में दो बार जल्दी आई ठंड
मौसम का पिछला ट्रेंड बताता है कि 2011 के बाद दो अवसर ऐसे रहे जब नवंबर पहले सप्ताह से ठंड की शुरुआत हो गई थी। कमजोर पश्चिमी विक्षोभ की वजह से इस बाद ठंड देरी से शुरू हो सकती है। पिछले 13 वर्षों में मुक्तेश्वर में नवंबर का सबसे कम तापमान 2012 में रहा था। उस वर्ष 30 नवंबर का तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस पहुंचा था। दूसरी ओर सबसे कम सर्द 2023 का नवंबर रहा। पिछले वर्ष 30 नवंबर को माह का सबसे कम 5.2 डिग्री तापमान पहुंचा था। पिछले 13 वर्षों में तीन अवसर ऐसे रहे जब माह का न्यूनतम तापमान नवंबर पहले पखवाड़े में रिकार्ड किया गया। इसमें 2018 में चार नवंबर को 2.8 डिग्री, 2013 में नौ नवंबर को 2.2 डिग्री व 2015 में सात नवंबर को 4.7 डिग्री पारा पहुंचा था।
सामान्य से तीन डिग्री अधिक तापमान
बुधवार को मुक्तेश्वर का न्यूनतम तापमान 9.6 डिग्री सेल्सियस रहा। सामान्य की अपेक्षा यह 2.4 डिग्री अधिक रहा। चंपावत, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, बागेश्वर, नैनीताल, ऊधम सिंह नगर आदि जिलों में भी तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार पोस्ट मानसून अवधि में वर्षा न होने से तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है।
नवंबर में सबसे कम तापमान (डिग्री सेल्सियस में)
2023 5.2(30)
2022 4.8(16)
2021 3.7(27)
2020 1.7(22)
2019 2.3(29)
2018 2.8(04)
2017 4.3(23)
2016 4.7(15)
2015 4.7(07)
2014 3.5(23)
2013 2.2(09)
2012 0.6(30)
2011 3.7(16)
(कोष्ठक में माह की तिथि)
छह नवंबर का न्यूनतम तापमान
चंपावत 9.1
मुक्तेश्वर 9.6
पिथौरागढ़ 13.5
कौसानी 12.0
नैनीताल 11.6
पंतनगर 17.2
देहरादून 16.5
टिहरी 11.0
वर्षा होने से किसानों को मिलती मदद
कृषि विशेषज्ञ धनपत कुमार का कहना है कि गेहूं, सरसों आदि की बुआई शुरू हो गई है। बीज के जमाव के लिए नमी की जरूरत होती है। इस समय थोड़ी बहुत वर्षा होने से किसानों को मदद मिलती। सिंचाई वाले क्षेत्रों व नमी वाली जगहों पर किसान रबी की बुआई शुरू कर सकते हैं।
अगले एक सप्ताह बहुत अधिक बदलाव नहीं
देहरादून मौसम विज्ञान केंद्र के निर्देशक बिक्रम सिंह का कहना है पिछले दो दिनों में बागेश्वर व पिथौरागढ़ में थोड़ी वर्षा हुई है। दोनों जिलों में आठ नवंबर को भी हल्की एक्टिविटी दिखेगी। फिलहाल 12 नवंबर तक वर्षा व हिमपात के लिए अनुकूल परिस्थिति नहीं है। अच्छी वर्षा हिमपात के लिए मजबूत पश्चिमी विक्षोभ का इंतजार करना होगा।





