वर्षा और हिमपात के लिए भले इंतजार करना पड़ रहा है, लेकिन ठंड दबे पाव दस्तक देने लगी है। यूं कहिए कि ठंड घर की दहलीज तक पहुंच गई है। रातें सर्द होने से कंबल के बाद अब रजाई की जरूरत महसूस होने लगी है। फिलहाल अगले एक सप्ताह भी वर्षा की कोई खास संभावना नहीं है, लेकिन ठंड धीरे-धीरे बढ़ने लगेगी।
तीन डिग्री सेल्सियस पहुंच तापमान
कुमाऊं मंडल के दो जिलों में न्यूनतम तापमान तीन-चार डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। नैनीताल में पारा सात से आठ डिग्री पहुंचने से पर्यटक सुबह-शाम के बजाय दिन में चहलकदमी करना पसंद कर रहे हैं। हिल स्टेशनों पर साफ हवा और खिली धूप से दिन का मौसम खुशनुमा बना हुआ है।
कम वर्षा होने से किसान चिंतित
पोस्ट मानसून अवधि में वर्षा न होने से इस बार ठंड देरी से शुरू हुई है। नवंबर से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने लगते हैं। इसकी वजह से उत्तराखंड समेत उत्तर भारत में नवंबर से फरवरी-मार्च के बीच वर्षा व हिमपात होता है। मौसम विभाग के अनुसार एक अक्टूबर से 18 नवंबर तक उत्तराखंड में 35 मिमी वर्षा होती है, जो इस बार मात्र 3.5 मिमी हुई। दीर्घ अवधि के औसत से 90 प्रतिशत कम वर्षा के बावजूद पिछले दो-तीन दिनों में मौसम बदला है।
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प्रमुख स्थानों का तापमान
अल्मोड़ा 3.5
चंपावत 3.8
पुरौला 4.8
मुक्तेश्वर 5.9
टिहरी 6.8
कौसानी 7.4
नैनीताल 7.4
देहरादून 9.8
(डिग्री सेल्सियस में)
मैदानी क्षेत्रों में छाने लगा कोहरा
पर्वतीय क्षेत्र में वर्षा नहीं हो रही। इस समय गेहूं, सरसों, मसूर आदि की बोआई हो चुकी है या अंतिम चरण में है। मैदानी क्षेत्र में कोहरा छाने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार 20 से 23 नवंबर के बीच हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर समेत अन्य मैदानी क्षेत्रों में कोहरा छा सकता है। इससे मैदानी क्षेत्रों में भी न्यूनतम तापमान कम होगा।
क्या कहते हैं मौसम विशेषज्ञ
देहरादून मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह का कहना है कि पश्चिम विक्षोभ आने लगे हैं, लेकिन वह बहुत कमजोर साबित हो रहे हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में ठंड शुरू हो गई है। धीरे-धीरे बढ़ेगी। फिलहाल अगले सप्ताह भी मौसम में खास हलचल नहीं है।






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