सर्द शाम से रागों की जुगलबंदी। बाल और वरिष्ठ कलाकारों की संगत। साथ में श्रोताओं का मंत्रमुग्ध होकर दाद देना। कलश संगीत कला समिति के पहले होली महोत्सव की खूबसूरत शाम कुछ ऐसी थी। रात एक बजे तक होल्यारों ने संगीत की ऐसी तान छेड़ी कि समय का पता नहीं चला।
नगर के शगुन बैंक्वेट हाल में आयोजित संगीतमय शाम की शुरुआत वरिष्ठ संगीतप्रेमी हेम पांडे ने राग श्याम कल्याण की मधुर रचना नंद गांव बरसाने चली.. से की। सागर मौनी ने कन्हैया संग खेलूं मैं होली.. सुनाकर माहौल में रंगल घोली। पिथौरागढ़ से आए मेहमान कलाकार शंकर पंत ने गाओ सुहागिन होली, बरस की घड़ी अलबेली.. से श्रृंगार घोला। राजू पंत ने ऐसो नीलज कन्हाई चीर चुराई कदंब चढ़ी बैठो.. सुनाकर श्रीकृष्ण और गोपियों की अलखेलियों का उल्लेख किया। पिथौरागढ़ से आए संगीत शिक्षक रवि ने कैसे धरूं जिया, बाली उमर मेरी, पिया घर नाहीं.. सुनाकर ऐसी रंगत घोली की महफिल यादगार बन गई। हेम पांडे ने रवि के साथ जुगलबंदी कर माहौल को अधिक रौनकीन बनाया। उत्तरांचल सांस्कृतिक समिति और एंजेल्स एकेडमी के बाल कलाकारों ने मधुर प्रस्तुति दी। मानस पंत ने बांसुरी वादन में सराहना बटोरी। राहुल, चारू पंत, संजय जोशी, प्रांजल पंत, विशाल पचौली, जगदीश खर्कवाल, प्रणव शर्मा, कमल वर्मा, संजय पंत, किरन जुकरिया, डीएस अधिकारी आदि ने शास्त्रीय होली गीतों का गायन किया।
कलश समिति ने जीवंत की पुरानी परंपरा
मुख्य अतिथि पालिकाध्यक्ष प्रेम पांडेय, विधायक प्रतिनिधि प्रकाश तिवारी, क्षेत्र प्रमुख प्रशासक रेखादेवी, सतीश पांडेय ने कहा होली महोत्सव ने बचपन की यादें ताजा कर दी। वह लोग भी बचपन में पिता, दादाजी के साथ बैठकी होली का हिस्सा हुआ करते थे। नगर में बैठकी होली महोत्सव के आयोजन के लिए कलश समिति के प्रयासों की सराहना हुई।
इनकी रही आयोजन में मौजूदगी
व्यापार मंडल अध्यक्ष विकास साह, कलश समिति अध्यक्ष हिमेश कलखुड़िया, सचिव गिरीश पंत, उपाध्यक्ष प्रेम बल्लभ भट्ट, पूर्व पालिकाध्यक्ष विजय वर्मा, दिनेश बिष्ट, महेश जोशी, डा. संतोष पांडेय, रोहित खर्कवाल, गौरव पांडेय आदि मौजूद रहे।





