पंचांगों में तिथियों की भिन्नता से हिंदू पर्वों की तिथि को लेकर असमंजस देखने को मिलता है। इस बार की होली को लेकर भी यह असमंजस रहने की संभावना है। कुछ पंचांगों में रंग की होली यानी छरड़ी 14 मार्च को बताई गई है, जबकि कुछ पंचांगों में 15 मार्च को होली दर्शाई गई है। ऐसे में आम लोगों में दुविधा होना लाजिमी है। इस सब के बीच उत्तराखंड पर्व निर्णय सभा के काशी विद्वत परिषद के विद्वानों के साथ बैठक कर तिथियों को लेकर हुई दुविधा के बीच पर्व मनाने की निर्णय सुनाया है।
रविवार 23 फरवरी को हुई बैठक में उत्तराखंड पर्व निर्णय सभा, पंचतत्व विद्वत परिषद एवं काशी विद्वत परिषद के ज्योतिर्विदों की संयुक्त बैठक गूगल मीट पर हुई। बैठक की अध्यक्षता पर्व निर्णय सभा के अध्यक्ष डा. जगदीश चंद्र भट्ट और संचालन सचिव डा. नवीन चंद्र जोशी ने किया। काशी विद्वत परिषद से डा. अमित मिश्रा, पंचतत्व विद्वत परिषद से भूपेंद्र पाठक के अलावा पंचांगकार डा. पवन पाठक, पर्व निर्णय सभा से उमेश चंद्र त्रिपाठी, डा. राम भूषण बिजलवाण, डा. मंजू जोशी, हरीश चंद्र जोशी, बसंत बल्लभ त्रिपाठी, पंचांगकार दीपक जोशी आदि उपस्थित रहे।
शास्त्र में बताए विधान का उल्लेख
उत्तराखंड पर्व निर्णय सभा के संरक्षक आचार्य डा. भुवन चंद्र त्रिपाठी ने होली पर्व पर बताई गईं शास्त्र सम्मत व्यवस्था संबंधी पत्र उनके प्रतिनिधि उमेश चंद्र त्रिपाठी ने पढ़ा। आचार्य डा. भुवन त्रिपाठी ने बताया कि फाल्गुन मास की भद्रा रहित पूर्णिमा में होलिका दहन व प्रतिपदा को होली (छरड़ी या धुलेंडी) मनाने का शास्त्रों में विधान बताया गया है। इस आधार पर 13 मार्च 2025 को रात्रि 11:30 बजे बाद होलिका दहन और 15 मार्च 2025 को होली (छरड़ी, धुलेंडी) मनाया शास्त्र सम्मत है। बैठक में मौजूद सभी विद्वानों ने शास्त्र सम्मत व्यवस्था पर सर्वसम्मति से अपनी स्वीकृति प्रदान की। इस आधार पर उत्तराखंड पर्व निर्णय सभा ने 13 मार्च को रात्रि 11:30 बजे बाद होलिका दहन करने व 15 मार्च 2025 को होली (छरड़ी, धुलेंडी) पर्व मनाने की घोषणा की है।





