प्रदेश सरकार अपने ही फैसले से घर गई है। ग्राम पंचायत और क्षेत्र पंचायत का कार्यकाल समाप्त होने के बाद अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त कर किया गया है। जिला पंचायत में निवर्तमान अध्यक्षों को ही प्रशासक बनाए जाने से सरकार की मंशा पर प्रश्न चिह्न लग गया है। निवर्तमान ग्राम प्रधान इसका यह कह कर विरोध कर रहे कि ‘एक देश एक विधान’ की बात करने वाली सरकार ‘एक पंचायत दो विधान’ कैसे कर सकती है।
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सोमवार को इस मामले में पूरे उत्तराखंड में विरोध देखने को मिला। कुछ दिन पहले कार्यकाल पूर्ण करने वाले प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी और एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर विरोध जताया। कहा, त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के लिए एक समान व्यवस्था है। जिला पंचायत अध्यक्ष की तर्ज पर ब्लॉक प्रमुखों और ग्राम प्रधान के पदों पर कार्यकाय पूर्ण कर चुके जनप्रतिनिधियों को ही प्रशासक नियुक्त किया जाए।
‘अध्यक्ष’ होंगे प्रशासक की जिम्मेदारी से मुक्त?
इस मामले में अब सरकार का निर्णय देखने वाला होगा। उम्मीद की जा रही है कि सरकार अपनी छवि ठीक करने के लिए जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक की जिम्मेदारी से मुक्त कर सकती है। जिला पंचायत अध्यक्ष को प्रशासक नियुक्त करने के फैसले का सरकार की छवि खराब हुई है। खुफिया विभागों के माध्यम से यह रिपोर्ट सरकार तक पहुंची है। सरकार अपना निर्णय बदल सकती है।





