चंपावत भाजपा ने पार्टी से बगावत कर निर्दलीय तौर पर चुनाव लड़ने वाले पांच पदाधिकारियों को निष्कासित कर दिया है। शनिवार को भाजपा जिलाध्यक्ष निर्मल माहरा ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने संस्तुति के बाद पांचों को छह वर्ष के लिए पार्टी से बाहर कर दिया गया है।
भाजपा से बाहर हुए चार पदाधिकारी निकाय अध्यक्ष का चुनाव लड़ रहे हैं। चंपावत के निवर्तमान पालिकाध्यक्ष विजय वर्मा सीएम पुष्कर धामी के उपचुनाव के समय भाजपा में शामिल हुए थे। विजय पालिकाध्यक्ष के लिए टिकट मिलने की उम्मीद में थे। सीट महिला आरक्षित होने से उन्होंने पत्नी ममता वर्मा के लिए टिकट मांगा। भाजपा ने प्रेमा पांडेय को टिकट देकर विजय को किनारे कर दिया। ममता चंपावत पालिकाध्यक्ष के लिए निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर खड़ी हैं।
बनबसा में दो बागी मैदान में
लोहाघाट में पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष रहे भूपाल सिंह मेहता भी टिकट न मिलने से नाराज होकर भाजपा छोड़ निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में कूद गए। बनबसा में विजेंद्र कुमार कांग्रेस के टिकट व सनी देवल निर्दलीय तौर पर नगर पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों भाजपा में बूथ अध्यक्ष थे। विजय वर्मा व ममता वर्मा को छोड़कर तीनों पदाधिकारी पूर्व में भाजपा से इस्तीफा दे चुके थे। शनिवार को भाजपा ने पांचों का निष्कासन कर दिया।
बगावती तेवर ने रोचक बनाया चुनाव
निर्दलीय प्रत्याशियों के मैदान में उतरने से इस बार निकाय चुनाव रोचक हो गए हैं। चंपावत नगरपालिका में तीन प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर बताई जा रही है। बनबसा में प्रत्याशी चार हैं लेकिन भाजपा-कांग्रेस में मुकाबला नजदीक तक जाने के आसार हैं। ऐसे में बगावत करने वाले प्रत्याशी जीतकर आते हैं तो क्या भाजपा उन्हें वापस पार्टी में शामिल करेगी, इस प्रश्न पर जिलाध्यक्ष माहरा सीधा जवान देने से बचते दिखे। उन्होंने साफ तौर पर न हां कहा न ना। बोले, पार्टी बगावत करने वालों से नाराज है। पार्टी के संविधान के अनुसार फिलहाल छह साल के लिए निष्कासित किया है। फिर उन्होंने बात बदल दी। जिलाध्यक्ष निर्मल माहरा के जवाब देने के अंदाज से कुछ लोग असहज हो सकते हैं।




