चंपावत जिले में गर्भवती व प्रसूताओं का इलाज बंद, महकमा नहीं दे पाया स्त्री प्रसूति विशेषज्ञ

शिक्षा/रोजगार

पिछले तीन माह से रोस्टर व्यवस्था पर चल रहा जिला अस्पताल का स्त्री एवं प्रसूति रोग (गाइनोकोलाजिस्ट) विभाग शुक्रवार को विशेषज्ञ डाक्टर विहीन हो गया। पूर्व में एक माह तक अव्यवस्था झेल चुकी चंपावत जिले की जनता गर्भवती व प्रसूता के उपचार के लिए फिर तरस गई है। गुरुवार देर शाम तक डाक्टरों का रोस्टर बढ़ाने या नए डाक्टर की नियुक्ति को लेकर किसी तरह का निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में गंभीर मरीजों को हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर करना होगा।

कभी दो विशेषज्ञ थे अब एक भी नहीं
चंपावत जिला अस्पताल में तैनात दो गाइनोकोलाजिस्ट ने जून समाप्ति से आना बंद कर दिया था। समाचार पत्रों की ओर से मुद्दा उठाने व जुलाई में एक महिला की मौत के बाद विभाग चेता। डीजी स्वास्थ्य तारा आर्या ने 25 जुलाई को अल्मोड़ा, नैनीताल व ऊधम सिंह नगर जिलों के पांच अस्पतालों में कार्यरत स्त्री नौ रोग विशेषज्ञों को 10-10 दिन के रोस्टर से चंपावत में सेवा देने का आदेश जारी किया। हल्द्वानी महिला अस्पताल व अल्मोड़ा जिला अस्पताल की तीन-तीन, उप जिला अस्पताल रानीखेत, जिला अस्पताल रुद्रपुर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र किच्छा की एक-एक डाक्टर को रोस्टर में शामिल किया गया।

25 जुलाई को हुआ था आदेश
27 जुलाई से शुरू रोस्टर 24 अक्टूबर को समाप्त हो गया। 25 अक्टूबर से जिला अस्पताल में कोई भी गाइनोकोलाजिस्ट नहीं रहेगा। जिले के दो उप जिला अस्पताल लोहाघाट व टनकपुर में भी गाइनोकोलाजिस्ट नहीं हैं। जिले की जनसंख्या तीन लाख से अधिक है।

बच्चों को भी नियमित उपचार नहीं
जिले में नियमित बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। पिछले दिसंबर से यह स्थिति है। सीएमओ डा. देवेश चौहान ने बताया कि एसीएमओ डा. चंद्रशेखर भट्ट स्वस्थ होकर काम पर लौट आए हैं। डा. भट्ट बाल रोग विशेषज्ञ हैं। ऐसे में व्यवस्था के तौर पर वह जिला अस्पताल में ओपीडी देखेंगे। वह पूर्व में भी इस तरह का सहयोग करते रहे हैं। कई बार बैठक, प्रशिक्षण आदि में जाने से व्यवस्था गड़बड़ा जाती है। टनकपुर अस्पताल में एनएचएम से 64 वर्षीय डाक्टर को अनुबंधित किया है, वह खुद स्वास्थ्य परेशानियों से जूझ रहे हैं। लोहाघाट में भी बच्चों का डाक्टर नहीं है।

स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति के लिए निदेशालय को कई बार लिखा गया है। वर्तमान में रोस्टर पर तैनात रहे डाक्टर आगे सेवा नहीं देना चाहते। उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही कोई व्यवस्था बनेगी और महिलाओं को बेहतर उपचार मिल सकेगा।
-डा. देवेश चौहान, सीएमओ, चंपावत

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