समान नागरिक संहिता (यूसीसी) में लिव-इन-रिलेशन को कानूनी मान्यता व बाहरी लोगों को एक वर्ष के प्रवास के बाद सरकारी योजनाओं का लाभ देने के विरोध समेत अन्य मांगों को लेकर पहाड़ी आर्मी संगठन महाशिवरात्रि को चंपावत गोल्ज्यू मंदिर से पहाड़ी जागरण यात्रा शुरू करेगा। पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा होते हुए चार मार्च को हल्द्वानी में यात्रा का समापन होगा। न्यायकारी देव गोल्ज्यू की धरती को यात्रा के शुभारंभ के लिए चुना गया है।
मंगलवार को चंपावत के एक होटल में हुई प्रेसवार्ता में संगठन के संस्थापक अध्यक्ष हरीश रावत ने कहा कि पहाड़ी हिंदू समाज को जगाने के लिए पहाड़ी हिंदू सशक्तीकरण अभियान शुरू किया है। किसी विशेष से संगठन की दुश्मनी नहीं हैं। बिना बात के किसी के विरोधी नहीं हैं, लेकिन जहां पहाड़ के मूल निवासियों व पहाड़ के संरक्षण करने वाले समाज की अस्मिता की बात आएगी चुप नहीं बैठा जाएगा। यूसीसी में किया लिव इन रिलेशन का प्रविधान पर्वतीय हिंदू संस्कृति को तहस-नहस करने वाला है। जिस कृत्य के लिए हिंदू संस्कृति में स्थान नहीं है, उससे कानूनी संरक्षण का स्वीकार नहीं किया जा सकता। इससे समाज विकृत होगा। अभियान संयोजक विनोद शाही ने कहा सात वचनों को लेकर अभियान चलाया जाएगा। पहाड़ी हिंदू समाज की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित करने, आर्थिक अवसरों पर बाहरियों का कब्जा हटाकर स्थानीय युवाओं को पहला अधिकार देने, उत्तराखंड में एनआरसी, भूकानून, मूल निवास, गोमाता को राज्य माता का दर्जा देने की मांग करते हैं। साथ ही नदियों, जंगलों का अनैतिक दोहन रोकने, पर्वतीय क्षेत्राें की उपेक्षा छोड़ने, नशे से पहाड़ को बचाकर बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएं दिलाने के लिए जागरण करेंगे। दोपहर बाद नुक्कड़ सभा के माध्यम से युवाओं ने अभियान से जुड़ने का आह्वान किया। यहां संगठन के हल्द्वानी महानगर अध्यक्ष भुवन पांडे, कोषाध्यक्ष भगवंत सिंह राणा, विनोद नेगी आदि शामिल रहे।
यह है अभियान का यात्रा कार्यक्रम
27 फरवरी: पिथौरागढ़ में नुक्कड़ सभा।
28 फरवरी: पिथौरागढ़ में सभा, मुवानी, थल व कांडा में जनसंपर्क
01 मार्च: बागेश्वर में जनसभा, गरुड़, कौसानी व साेमेश्वर में जनसंपर्क
02 मार्च: अल्मोड़ा में नुक्कड़ सभा, खानीखेत में जनसंपर्क
03 मार्च: द्वाराहाट में नुक्कड़ सभा, चौखुटिया, मासी, भिकियासैंण, भतरौजखान में जनसंपर्क
04 मार्च: नैनीताल में नुक्कड़ सभा, भवाली व भीमताल में नुक्कड़, हल्द्वानी में समापन





