कौशल से पिरूल लेडी बनीं मंजू शाह, सजावटी सामान से लेकर तैयार कर रहीं ज्वेलरी

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चीड़ की नुकीली पत्तियों का दैनिक जीवन में उपयोग की कल्पना करना असंभव लगता था। मोटे तौर पर पिरूल को जंगल की आग के कारण के रूप में देखा जाता है। महिलाओं को शिकायत रहती कि पिरूल खेती चौपट करता है। अब पिरूल से घर सज रहा है। दैनिक जरूरत की सामग्री के तौर पर पिरूल उपयोग में आ रहा है। यहां तक कि इससे आकर्षक ज्वेलरी तैयार हो रही है। मंजू आर शाह उन गिने-चुने नामों में शामिल हैं, जन्होंने शुरुआती तौर पर पिरूल से उत्पाद तैयार किए। अपने इसी काम की बदौलत आज मंजू पिरूल लेडी नाम से पहचान कायम कर चुकी हैं।

देशभर में बना चुकीं पहचान

अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट ब्लाक के हाट गांव निवासी मंजू आर शाह ने पिरूल उत्पाद तैयार कर हस्तशिल्प को नया आयाम दिया है। मंजू के कौशल व दृढ़ इच्छशक्ति की बदौलत पहाड़ के जंगलों में बहुतायत से पाए जाने वाली चीड़ की पत्तियां (पिरूल) आर्थिकी का माध्यम बन चुकी हैं। राजकीय इंटर कालेज ताड़ीखेत में प्रयोगशाला सहायक पद पर कार्यरत मंजू शाह पिछले तीन-चार वर्षों से तेजी से उभरी हैं। कुशल कार्य की वजह से आज वह उत्तराखंड के बाहर भी अपनी पहचान कायम कर चुकी हैं। इसके लिए वह कई पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी हैं। मंजू पिरूल को हस्तशिल्प से जोड़कर पहाड़ की महिलाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें आर्थिक मजबूती प्रदान कर रही हैं। अभी तक सैकड़ों महिलाओं को प्रशिक्षित कर चुकी हैं। काेरोना काल में आनलाइन शुरू हुआ प्रशिक्षण अब आनलाइन माध्यम से विस्तार पा रहा है।

एक दर्जन से अधिक उत्पाद बनाए

पिरूल लेडी मंजू शाह पिरूल से टोकरी, पूजा थाल, फूलदान, आसन, पेन स्टैंड, डोरमैट, टी कोस्टर, डाइनिंग मैट, ईयर रिंग, मोबाइल चार्जिंग पॉकेट, पर्स, हैट, पेंडेंट, अंगूठी आदि तैयार कर रही हैं। घर व आफिस की साज-सज्जा के साथ ये वस्तुएं दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली हैं। इको फ्रेंडली उत्पादों को काफी पसंद किया जा रहा है। आनलाइन माध्यम से इन्हें देशभर में मंगाया जा सकता है।

पहली बार चंपावत पहुंचीं प्रशिक्षण देने

हस्तशिल्प सेवा केंद्र अल्मोड़ा की ओर से 24 सितंबर से 23 अक्टूबर के बीच खेतीखान में डिजाइन विकास कार्यशाला आयोजित की गई। पिरूल कलाकार मंजू शाह ने स्थानीय महिलाओं को पिरूल से तोरण, वाल आर्ट, ट्रे, लैंप सेट, बर्ड हाउस आदि तैयार करने का प्रशिक्षण दिया। 40 से अधिक महिलाएं प्रशिक्षण का हिस्सा बनीं।

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