कुमाऊनी हमारा गौरव, इसे मिले उत्तराखंड की दूसरी भाषा की मान्यता

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कुमाऊंनी भाषा का 16वां राष्ट्रीय सम्मेलन रविवार को चंपावत में शुरू हो गया है। गोरलचौड़ मैदान स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित सम्मेलन का शुभारंभ भाषा संस्थान की उप निदेशक सुखविंदर कौर ने किया। अतिथीय संबोधन में उन्होंने कहा कि उत्तराखंड भाषा संस्थान कुमाऊंनी सहित विभिन्न भाषाओं को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। कुमाऊंनी भाषा के संवर्धन के लिए हर मुमकिन प्रयास करने का भरोसा दिलाया।

झांकी से दिखी लोक संस्कृति की झलक

सम्मेलन के शुभारंभ पर चंपावत रोडवेज स्टेशन से आयोजन स्थल तक शोभायात्रा निकाली गई। जिसके माध्यम से से लोक संस्कृति को दर्शाने का प्रयास किया गया। भाषा संस्थान के सदस्य कौस्तुभानंद चंदोला की अध्यक्षता में 10 नवंबर को हुए कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में विशिष्ट अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष ज्योति राय ने कहा कि कुमाऊंनी बोलने वाले सिर्फ उत्तराखंड में ही नहीं, बल्कि प्रदेश के बाहर लाखों की संख्या में है। कुमाऊंनी भाषा के विकास के लिए काम करने की बात कही।

कुमाऊनी को आठवीं अनुसूची में जगह मिले

मुख्य वक्ता कुमाऊंनी भाषा के विद्वान और पहरू पत्रिका के संपादक डॉ. हयात सिंह रावत ने कहा कि कुमाऊंनी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के साथ ही प्रदेश की दूसरी भाषा बनाया जाना चाहिए। इसमें किसी तरह का तकनीकी पेंच नहीं है। नई शिक्षा नीति व कुमाऊंनी भाषा सहित कुमाऊंनी साहित्य के विकास और विस्तार पर मंथन हुआ। कुमाऊंनी साहित्य की प्रदर्शनी भी लगी।

इनकी रही मौजूदगी

शिक्षक नवीन पंत के संचालन में हुए कार्यक्रम में कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि गीतांजलि सेवा समिति के अध्यक्ष सतीश चंद्र पांडेय, चंपावत की ब्लॉक प्रमुख रेखा देवी, उप प्रमुख मोनिका बोहरा, पूर्व प्रमुख भगीरथ भट्ट, डॉ. बीसी जोशी के अलावा साहित्यकार भूपेंद्र देव ताऊ, जन कवि प्रकाश जोशी, डॉ. सतीश पांडेय, विष्णु भट्ट सरल, डॉ. टीआर जोशी, हिमांशु जोशी, नीरज पंत, कृपाल सिंह शीला, डॉ. आनंदी जोशी, नीरज जोशी, हिमालयन अध्ययन केंद्र के निदेशक डॉ. दिनेश जोशी, हेमलता जोशी, महेंद्र ठकुराठी, जनार्दन चिलकोटी सहित बड़ी संख्या में कुमाऊंनी साहित्यकार मौजूद थे।

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