एक तरफ चुनावी शोर, दूसरी तरफ गूंजे होली गीतों के मधुर स्वर

धर्म/समाज/संस्था

नगर निकायों के लिए प्रचार अभियान शुरू हो गया है। नगरीय क्षेत्रों में एक तरफ जहां प्रत्याशियों का प्रचार अभियान चल रहा है, दूसरी ओर शास्त्रीय होली गीतों के स्वर फूट रहे हैं। रविवार शाम पौष मास के चतुर्थ रविवार को कलश संगीत कला समिति चंपावत के कार्यालय पाण्डेय पूजा सदन खड़ी बाजार चम्पावत में बैठकी होली हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता संगीत प्रेमी धर्म सिंह अधिकारी व नारायण दत्त जोशी ने की।
कार्यक्रम का शुभारम्भ से पहले गिरिश पन्त ने दीप प्रज्वलित किया। बाल कलाकार लक्षिता एक स्वर मेरा भी मिला दे.. से सरस्वती वंदना की। मानस पन्त ने तबले पर बहुत सुन्दर प्रस्तुति दी। आयुष भट्ट ने “राग काफी” में जटन विराजत गंग भोले नाथ दिगम्बर.., हिमेश कलखुडिया ने राग काफी में टूट गयो शिव ध्यान, वंसुरिया कितनी सुहानी.., धर्म सिंह अधिकारी ने राग काफी में तू मृत्यु लोक में आई, नमो जग तारिणी भृगु तारिणी.., गिरिश पन्त ने राग काफी में हरि का नाम हैं सांचा बाकी सब नाम है झूठे.., महेश जोशी ने “धमार” में मन सुख लाओ मृदंग, नाचत आयी चन्द्रावली.. सुनाकर माहौल में रंगत घोली। प्रेम बल्लभ भट्ट, संतोष पाण्डे, दिनेश बिष्ट, शान्ति जोशी ने भी होली राग प्रस्तुत किए। यहां प्रकाश जोशी, श्याम गिरि, रंजेश गिरि आदि मौजूद रहे।

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