आर्थिक सुधार व सत्ता परिवर्तन के योग लाएगा सिद्धार्थी संवत्सर, जानें नव वर्ष का फलादेश

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नव संवत्सर विक्रम संवत 2082 की शुरुआत 30 मार्च को होने जा रही है। इसी दिन से चैत्र नवरात्र की शुरुआत भी होगी। फिलहाल यहां बात नए संवत्सर के फलादेश की। कुमाऊं में 120 वर्षों से प्रचलित पंडित रामदत्त ज्योतिर्विद संस्थापित पंचांग पर आधारित वार्षिक फलादेश बता रहे हैं शिक्षाविद् व ज्योतिषाचार्य डा. नवीन चंद्र जोशी। डा. जोशी श्री महादेव गिरि संस्कृत महाविद्यालय हल्द्वानी के प्राचार्य पद पर तैनात हैं। आइए विस्तार से जानते हैं फलादेश…

मेवे, दुग्ध व रस पदार्थ में कमी
नए संवत्सर का नाम सिद्धार्थी है। वर्ष के राम और मंत्री सूर्यदेव हैं। दोनों प्रमुख विभाग एक ही के अधीन होने से यह वर्ष मिलेजुले फल देने वाला रहेगा। धनधान्य की दृष्टि से वर्ष अच्छा रहेगा। वर्षा सामान्य होगी। हालांकि फल-फूल, दुग्ध व रस पदार्थों में कमी आ सकती है। सूर्यदेव का नेतृत्व दुनिया में भारत का मान बढाएगा। आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के प्रयास होंगे और यह फलीभूत भी होते दिखाई देंगे। परस्पर राजनीतिक मतभेद बढ़ने की वजह से नया साल कुछ जगह सत्ता परिवर्तन के योग भी बना सकता है।

अग्निभय, राय भय, तस्करी का खतरा
ज्योतिष विज्ञान के अनुसार ग्रहों की स्थिति के आधार पर वर्षफल तय होता है। नव संवत्सर के राजा सूर्यदेव हैं। मंत्री दायित्व के साथ वर्षा प्रबंधन की जिम्मेदारी भी सूर्यदेव संभालेंगे। सूखे फल-मेवे बुध व धान्य विभाग चंद्रदेव के अधीन रहेगा। उद्यान शुक्र, वित्त मंगल व रक्षा मंत्रालय शनिदेव के पास रहने वाला है। कुल मिलाकर सात विभाग शुभ व तीन अशुभ ग्रहों के अधीन हैं। अधिक विभाग शुभ ग्रहों के अधीन होने से वर्ष में शुभ फलों का प्रभाव रहेगा। अग्निभय, राजभय के साथ तस्करी का खतरा रहेगा। इस तरह आपराधिक घटनाएं बढ़ सकती हैं। सौंदर्य से जुड़ी सामग्री महंगी हो सकती है। प्राकृतिक बाधाएं भी थोड़ी बहुत परेशान कर सकती हैं।

राशियों पर दिखेगा अलग-अलग प्रभाव
ग्रहों की स्थिति का राशियों पर भी अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। नव संवत्सर में ग्रहों की स्थिति के आधार पर क्या स्थिति बन रही है इसे भी जान लेते हैं। जातक ध्यान दें कि यहां दिया जा रहा वार्षिक फलादेश बहुत संक्षेप है। हमारी कुंडली में ग्रहों की स्थिति के आधार पर हर व्यक्ति का अलग-अलग फलादेश बनता है। संक्षिप्त जानकारी देने के लिए यहां वार्षिक फलादेश दिया जा रहा है। इस वर्ष गुरु, शनि, राहु, केतु आदि ग्रहों का प्रभाव है। इनका प्रभाव कम करने के लिए जपदान आदि का विधान बताया गया है। ऐसा करने से निश्चित ही अशुभ फलों में कमी आएगी।

राशियों का संक्षिप्त वार्षिक फलादेश
मेषः
वर्ष सामान्य फलप्रद। शनि का प्रभाव चिंतित करेगा। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें। धनागम में रुकावट। चल-अचल संपत्ति में दीर्घ अवधि का निवेश शुभ। गुरु, शनि, केतु का जप दान शुभ रहे।

वृषःवर्ष शुभ फलदायक। भौतिक संसाधनों में वृद्धि, रुके कामों के लिए राह खुलेगी। कार्यक्षेत्र में प्रभाव, यश-कीर्ति बढ़ेगी। मंगल कार्य होंगे। राहु-केतु जपदान से अशुभ फलों का निराकरण होगा।

मिथुनः वर्ष मिश्रित फलदायक। गुरु, शनि, राहु का प्रभाव चिंता बनाए रखेगा। केतु के प्रभाव से सुख-संसाधनों में वृद्धि, सफलता की राह खुलेगी। गुरु, शनि, राहु जप दान करना फलदायक।

कर्क: वर्ष सामान्य रहेगा। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें। अनावश्यक धन खर्च व कर्ज लेनदेन से बचें। राजकार्य या व्यापार से सुख प्राप्त होगा। गुरु, शनि, राहु व केतु जपदान करना बेहतर।

सिंहःवर्ष शनि की ढैया के प्रभाव में रहेगा। चल-अचल संपत्ति में निवेश अच्छा। पारिवारिक कलह से बचें। सुख-संसाधन बढ़ेंगे। धार्मिक उत्सव, यात्रा में धन व्यय। शिव, हनुमान की पूजा करें।

कन्याःधनागम की दृष्टि से वर्ष अनुकूल। नए कार्यों से लाभ। साझा कार्य करने से बचें। प्रतियोगी परीक्षा, पराक्रम के कार्यों में सुखानुभूति। गुरु, शनि, केतु जपदान व हनुमानजी की आराधना करें।

तुलाःयश सम्मान में आशातीत वृद्धि। राज कार्य या व्यापार से लाभ। रुके धन की प्राप्ति होगी। प्रतिस्पर्धी व विरोधी शांत रहेंगे। नौकरी में स्थानांतरण के योग। राहु जपदान व शिवार्चन शुभ रहे।

वृश्चिकःअचल संपत्ति से लाभ। धार्मिक कार्यों में रूचि बढ़ेगी। संतान पक्ष चिंतित कर सकता है। अकारण भय से मानसिक कष्ट। अशुभ फलों के निराकरण को शिवार्चन, हनुमानजी की पूजा करें।

धनुःयश व सम्मान में वृद्धि। नौकरी में पदोन्नति के योग। धनागम के स्रोत में व्यवधान परंतु नई राह भी खुलेंगे। शनि, राहु-केतु के अशुभ फलों के निराकरण को शिव, हनुमान आराधना, ग्रह जपदान करें।

मकरःधनागम के कई स्रोत मिलेंगे, परंतु आर्थिक स्वतंत्रता नहीं मिलेगी। व्यापार को लेकर सावधानी बरतें। अशुभ फल कम करने को गुरु, राहु व केतु का जपदान, हनुमानजी की स्तुति करें।

कुंभ: शनि के प्रभाव के बावजूद सुख-संसाधनों में वृद्धि होगी। रोग व आर्थिक कष्ट चिंतित कर सकते हैं। अकारण विवाद से बचें। शिवार्चन, हनुमान आराधना व शनि, राहु, केतु जपदान करें।

मीनःवर्ष शनि से प्रभावित रहेगा। भूमि, मकान, वाहन में निवेश से लाभ। सुख-संसाधन बढ़ेंगे, लेकिन स्वास्थ्य पक्ष चिंतित कर सकता है। प्रतिस्पर्धी बढ़ेंगे। गुरु, शनि, राहु जपदान करना बेहतर।

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