मुख्यमंत्री पुष्कर धामी के विधानसभा क्षेत्र चंपावत में हर कोई नगरपालिका चेयरमैन बनने को लालायित है। यहां टिकट से पहले ही घमासान की स्थिति है। बुधवार को चंपावत पहुंचे तीन पर्यवेक्षकों के सामने 10 दावेदारों ने पालिकाध्यक्ष के टिकट के लिए दावेदारी पेश की। हर कोई अपनी जीत के समीकरण और टिकट पाने का आधार बता रहा है। शुरुआती तौर पर कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। ऐसे में इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि टिकट कटने पर कुछ दावेदार स्वतंत्र रूप से ताल ठोक सकते हैं। चंपावत नगर पालिका में पहले भी ऐसा होता आया है। 2018 के चुनाव में पूर्व पालिकाध्यक्ष प्रकाश तिवारी भाजपा से टिकट न मिलने पर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में कूद गए थे। हालांकि तब उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
सभी के अपने दावे अपने तर्क
नगरपालिका चंपावत में भाजपा से टिकट के लिए पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमा पांडेय समेत 10 महिलाओं ने दावेदारी की है। सभी के अपने-अपने तर्क हैं। निवर्तमान पालिकाध्यक्ष विजय वर्मा अपनी पत्नी ममता वर्मा, पूर्व पालिकाध्यक्ष प्रकाश तिवारी खुद की पत्नी कविता तिवारी के लिए टिकट मांग रहे हैं। विजय वर्मा का तर्क है वह पिछली बार कांग्रेस के टिकट से चेयरमैन बने हैं। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को हराया है। सीएम के उपचुनाव के समय वह अपना सब कुछ छोड़कर भाजपा में आए हैं ऐसे में उनकी दावेदारी बनती है। प्रकाश तिवारी अब के समीकरणों को अलग बताते हुए अपना वोट बैंक मजबूत बताते हैं। प्रेमा पांडेय का पहले जिला पंचायत अध्यक्ष रहने का तर्क है। गंगा खाती पार्टी संगठन से सक्रियता से जुड़े होने का तर्क दे रही हैं। निवर्तमान ज्येष्ठ उप प्रमुख मोनिका बोहरा अब नगर की राजनीति करने को लालायित हैं। इसी तरह मणिप्रभा तिवारी, तनुजा पुनेठा, आशा तड़ागी, चंचला अधिकारी, कविता गोस्वामी के भी अपने तर्क हैं। ऐसे में भाजपा प्रदेश संगठन के लिए एक नाम पर मोहर लगाना मुश्किल होने वाला है।




