कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। कार्यकाल पूर्ण करने वाले निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त करने का मामला पहले ही उच्च न्यायालय में है। जनहित याचिका में निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के फैसले को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने राज्य सरकार व राज्य निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई छह जनवरी को होगी।
पूर्व प्रधान ने दाखिल की याचिका
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति विवेक भारती शर्मा की खंडपीठ में बुधवार को पूर्व ग्राम प्रधान विजय तिवारी की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में कहा है कि पहले राज्य सरकार ने जिला पंचायतों में निवर्तमान अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त किया, फिर 12 दिसंबर को अधिसूचना जारी कर ग्राम पंचायतों में चुनाव कराने के बजाय निवर्तमान ग्राम प्रधानों को भी प्रशासक नियुक्त करने के साथ ही उन्हें वित्तीय अधिकार दे दिए है। पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी सरकार ने चुनाव कार्यक्रम तक घोषित नहीं किया है।
सरकार की मंशा पर सवाल
प्रधानों के प्रशासक नियुक्त होने के बाद पंचायत चुनाव को प्रभावित कर सकते है, इसलिए ग्राम पंचायतों का शीघ्र चुनाव कराया जाय। सर्वोच्च न्यायालय के कई निर्णय है, जिनमें कहा गया है कि प्रशासक तभी नियुक्त किया जा सकता है, जब ग्राम सभा को किन्ही कारणों से भंग कर दिया गया हो। भंग करने के बाद भी वहां छह माह के भीतर चुनाव कराना आवश्यक होता है। इससे अधिक प्रशासकों का कार्यकाल नहीं हो सकता। राज्य में इसका उल्टा हो रहा है। इससे प्रतीत होता है कि राज्य सरकार अभी चुनाव कराने की मंशा नहीं रखती है।





