जल्दबाजी में लिया गया अदूरदर्शी निर्णय पार्टी के लिए कितना नुकसानदायक सिद्ध हो सकता है, सत्ता पर काबिज धामी सरकार इसे समझ गई है। 12 चेहरों को खुश करके प्रदेशभर के साढ़े सात हजार जनप्रतिनिधियों से नाराजगी पुष्कर धामी सरकार को अच्छी नहीं लगी। लिहाजा निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्षों के बाद अब ग्राम प्रधान और क्षेत्र प्रमुखों को प्रशासक का तमगा दे दिया गया है।
समिति की रिपोर्ट के बाद बदला निर्णय
शासन ने हरिद्वार जिले को छोड़कर अन्य ग्राम पंचायत के निवर्तमान ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत प्रमुखों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया है। इसके अध्ययन के लिए बनी समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद गुरुवार शाम शासन ने इसका आदेश जारी कर दिया। शासनादेश के मुताबिक हरिद्वार जिले को छोड़कर राज्य की समस्त गठित ग्राम पंचायत के कार्यकाल की समाप्ति के छह माह के भीतर या नई ग्राम पंचायत का गठन किए जाने तक जो भी पहले हो प्रशासक के रूप में संबंधित जिले की ग्राम पंचायत के निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक रहेंगे। क्षेत्र पंचायतों में निवर्तमान क्षेत्र पंचायत प्रमुख प्रशासक होंगे। इसका विधिवत आदेश डीएम जारी करेंगे।
12 जिलों में 7478 निवर्तमान प्रधान
प्रदेश के हरिद्वार जिले के 318 ग्राम प्रधानों को छोड़कर राज्य के 7478 निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाया जाएगा। इसमें अल्मोड़ा जिले में 1160, नैनीताल में 479, बागेश्वर में 402, पिथौरागढ़ में 686, चंपावत में 313, ऊधमसिंह नगर में 375, पौड़ी में 1173, टिहरी में 1035, चमोली में 610, रुद्रप्रयाग में 336, उत्तरकाशी में 506 और देहरादून जिले में 401 निवर्तमान ग्राम प्रधान शामिल हैं। राज्य के 95 ब्लॉकों में हरिद्वार को छोड़कर अन्य में क्षेत्र पंचायत प्रमुख प्रशासक बनेंगे। निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक के रूप में नियुक्त किए जाने को प्रधान संगठन ने सरकार का ऐतिहासिक फैसला बताया है।





