बांग्लादेश में अत्याचार के विरोध में उत्तराखंड में सड़कों पर उतरे हिंदूवादी

धर्म/समाज/संस्था

पिछले कुछ दिनों में बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर अत्यार के मामले बढ़े हैं। मंदिरों को निशाना बनाकर तोड़फोड़ की जा रही है। उत्तराखंड में हिंदूवादियों ने इस घटना का विरोध किया है। मंगलवार को कुमाऊंभर से विरोध के सवर उठे। हल्द्वानी में राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के बैनर तले एमबी इंटर कालेज मैदान में सैकड़ों की संख्या में एकत्र होकर एक स्वर में बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा की मांग उठाई। श्रीराम व भारत माता के जयकारों के नारे लगे।
एमबी इंटर कालेज में विशाल जनसमूह जुलूस के रूप में तिकोनिया चौराहे तक गया, जहां कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा गया। इस्कॉन के गोपी नाथ दास महाराज ने कहा कि सनातन और हिंदुत्व को बचाने के लिए एकजुट होने का समय है। राष्ट्र की रक्षा के लिए सनातनियों को घर से निकलकर आगे आना होगा। जन-जन को एकत्र करना होगा। त्याग और समर्पण का भाव जागृत कर राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए आगे आना होगा। कथावाचक नमन कृष्ण महाराज ने कहा कि बंग्लादेश जब पाकिस्तान से अलग हुआ था तब हिंदुओं की जनसंख्या 26 प्रतिशत थी। अब कम होकर छह प्रतिशत रह गई है। लगातार डरा-धमकाकर और अत्याचार कर मतांतरण कराया गया।
पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा जिलों में भी लोगों ने सड़क पर उतरकर बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को रोकने के लिए दबाव बनाने की मांग की गई। लोगों ने कहा कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विश्व में कहीं भी हिंदू समाज का व्यक्ति रहता है जब उस पर विपत्ति आए हमें जात-पात और ऊंच-नीच छोड़कर उसकी मदद के लिए आगे आना चाहिए। साथ व्यक्तिगत कोई किसी जाति या वर्ग का हो सकता है, लेकिन जब समूह और समग्र समाज की बात आती है तो हम हिंदू के भाव होना चाहिए। कश्मीर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पंडितों के साथ नहीं बल्कि हिंदुओं के साथ नरसंहार हुआ था, लेकिन हिंदू एकता का छिन्न-भिन्न करने वाली शक्तियां जाति व वर्ग में बांटने का काम करती हैं, ऐसी शक्तियों को एकता दिखाकर जवाब देना होगा।

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