विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन प्रश्न काल के दौरान कृषि मंत्री गणेश जोशी विधायकों के निशाने पर आ गए। प्राकृतिक और परंपरागत खेती के प्रश्न ने मंत्री को ऐसा उलझाया कि उनसे कुछ कहते न बना। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों ने प्राकृतिक व परंपरागत खेती से जुड़े प्रश्नों की ऐसी झड़ी लगाई कि कृषि मंत्री गणेश जोशी इनमें बुरी तरह उलझ गए। विधायक उनके उत्तर से संतुष्ट नहीं हुए। परिणामस्वरूप पीठ ने प्राकृतिक खेती से जुड़े मूल प्रश्न को स्थगित कर दिया।इस सत्र में यह पहली बार हुआ, जब प्रश्नकाल में रखे गए किसी तारांकित प्रश्न को स्थगित करना पड़ा।
इस तरह शुरू हुआ पूरा मामला
भाजपा विधायक बृजभूषण गैरोला ने राज्य में प्राकृतिक खेती के दृष्टिगत इसकी कार्ययोजना, क्षेत्रफल, विपणन की नीति से जुड़े प्रश्न पूछे थे। जवाब में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि राज्य के चार जिलों पौड़ी, टिहरी, चमोली व उत्तरकाशी में 1950 हेक्टेयर में नमामि गंगे प्राकृतिक कारिडोर योजना के तहत प्राकृतिक खेती हो रही है। इसके अलावा प्राकृतिक खेती के लिए केंद्र पोषित नेशनल मिशन आन नेचुरल फार्मिंग का क्रियान्वयन किया जाना है। 303 आउटलेट संचालित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से प्राकृतिक कृषि उत्पादों की बिक्री होगी। इस पर विधायक गैरोला ने अनुपूरक के जरिये पूछा कि प्राकृतिक खेती में कौन सी फसलें हैं। मंत्री ने जब गेहूं, धान, मिलेट, दलहन, तिलहन को गिनाया तो विधायकों का कहना था कि ये तो पारंपरिक फसलें हैं। इसके बाद तो विधायकों के बीच से एक के बाद एक प्रश्न आते चले गए।
चमोली, कापड़ी, प्रीतम ने पूछे प्रश्न
भाजपा विधायक विनोद चमोली ने जानना चाहा कि प्राकृतिक व परंपरागत खेती क्या है और इनमें कौन-कौन सी फसलें हैं। यह भी पूछा कि कौन कौन सी योजनाओं में प्राकृतिक खेती हो रही है। ऐसा ही प्रश्न कांग्रेस विधायक भुवन कापड़ी ने भी किया। कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने प्रश्न किया कि 1950 हेक्टेयर में हो रही प्राकृतिक खेती में कितना उत्पादन हुआ और कितनी बिक्री हुई। विभागीय मंत्री ने कहा कि योजना अभी प्रारंभ हुई है। परिणाम बाद में आएंगे। मंत्री ने आंकड़े भी रखे, लेकिन विधायक संतुष्ट नहीं हुए।
नेता प्रतिपक्ष ने अफसरों को लिया निशाने पर
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि प्रश्नों के सही उत्तर नहीं आ रहे हैं। आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी मंत्री को गुमराह कर रहे हैं। इसके बाद प्रश्न स्थगित कर दिया गया।





