महान समाज सुधारक और आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती पर हरिद्वार के नमामि गंगे घाट पर 5100 कुंडी राष्ट्रव्रत महायज्ञ का आयोजन किया गया। ये क्षण आर्य समाज की स्थापना का 150 वर्ष पूरे होने का भी अवसर था। पावन मौके पर हल्द्वानी डीएवी स्कूल के 200 विद्यार्थियों ने महायज्ञ में हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन युवा समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगी सूरी ने किया। उन्होंने बताया कि यह आयोजन वैदिक संस्कृति और मूल्यों की लौ को प्रज्वलित करने के लिए किया गया। यज्ञ का लक्ष्य हर भारतवासी को समृद्ध विरासत से जोड़ना है। राष्ट्र व्रत महायज्ञ हमारे वैदिक विरासत को पुनर्जीवित करने और संजोने का एक सामूहिक प्रयास है।
भव्यता-दिव्यता देखते बनी
सूरी ने कहा, यज्ञ जीवन का सार और आधार निर्धारित करने वाला सर्वश्रेष्ठ कर्म है। मां गंगा के तट पर गायत्री मंत्र और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महायज्ञ की पूर्ण आहुति हुई। महायज्ञ की दिव्यता और भव्यता के श्री कर्मेंद्र सिंह अधिकारी हरिद्वार, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ दिनेश शास्त्री, डीएवी मेनेजमेंट कमेटी के वी. सिह, के कांकरिया, जे. अदलखा, अल्पना शर्मा, पीसी पुरोहित और सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्य साक्षी बने।





