अल्मोड़ा जिले में पीएमजीएसआइ के तहत सड़कों के सुधारीकरण व डामरीकरण का कार्य सवालों के घेरे में हैं। खासकर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल समेत क्षेत्रवासियों ने सड़कों में बिछ रहे डामर की गुणवत्ता पर उंगली उठाई है। पूर्व विधायक कुंजवाल ने दन्या-आरासलपड़ रोड का जमीनी निरीक्षण किया था। इसका वीडियो भी फेसबुक पर खूब वायरल हुआ। सरकार की छवि खराब होते देख विधायक मोहन सिंह महरा भी सक्रिय हो गए हैं। महरा ने डीएम अल्मोड़ा को पत्र लिखकर कहा है कि दन्या-आरासलपड़, जैंती-पीपली व जैंती-भनोली मोटर मार्ग की गुणवत्ता पर कुछ लोगों और राजनीतिक दलों के लोगों के सवाल उठाने का मामला समाचारपत्रों और सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। विधायक मोहन सिंह महरा ने डीएम से आग्रह किया है कि तीनों सड़कों पर डामरीकरण के कार्य पर तत्काल रोक लगाने के साथ उच्च स्तरीय जांच जरूरी है। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करने को कहा गया है।
तो इस वजह से टूटी महरा की चुप्पी!
लगभग 30 किमी लंबी दन्या-आरासलपड़ सड़क 2008-09 में बनी थी। निर्माण के 17 वर्षों बाद सड़क पर पहली बार डामरीकरण का कार्य हो रहा है। 20 करोड़ के इस काम को चंपावत जिले के रहने वाले ठेकेदार दिया गया है। ठेकेदार सत्तापक्ष से जुड़ा हुआ है। पिछले दिनों पूर्व विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल समर्थकों के साथ सड़क का हाल देखने पहुंचे थे। आठ से 10 वर्ष के बच्चों ने सड़क पर बिछे डामर को हाथ से ही उखाड़ दिया। डामर बिछाने से पहले सतह की सफाई-धुलाई आदि नहीं की गई थी। कोलतार भी नहीं बिछाया गया था। जिससे बिछाए गए डामर की पपड़ी उतर रही थी। सरकार की छवि खराब होने की वजह से स्थानीय विधायक मोहन सिंह महरा ने को चुप्पी तोड़नी पड़ी है।





