पेयजल संकट से जूझते लोहाघाट के लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। बरसात, जाड़ा या गर्मी कोई भी मौसम हो यहां के लोगों को जरूरत के अनुरूप पानी नहीं मिल पाता। अब पानी सिर से ऊपर गया तो क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने संघर्ष समिति गठित कर आंदोलन की राह अपना ली है। सरयू लिफ्ट पेयजल योजना का निर्माण कराने की मांग को लेकर गुरुवार से एसडीएम कार्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।
वक्ताओं ने कहा कि सरयू लिफ्ट पेयजल योजना की मांग करते हुए गले सूख चुके हैं। कई बार डीपीआर तैयार होने के बाद भी योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा रहा है। नगर के लिए बनी पेयजल योजनाओं से लोगों को पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो रही है। लोगों को अक्कल धारे, मोडेक्स हैंडपंप और सोलर हैंडपंपों से पानी भरना पड़ रहा है। नलों में तीसरे और चौथे दिन पानी आ रहा है। नौबत यहां तक आ गई है कि लोग लोहावती नदी का दूषित पानी पीने को मजबूर हो गए हैं। सीएम पुष्कर धामी ने सरयू लिफ्ट योजना का निर्माण करने की घोषणा की है, लेकिन अभी तक योजना की डीपीआर का कार्य भी पूरा नहीं हो पाया है। यहां संघर्ष समिति अध्यक्ष विपिन गोरखा, प्रह्लाद मेहता, डीडी पांडेय, शैलेंद्र राय, रणजीत अधिकारी, कै.आरएस देव, कैलाश देव, राजकिशोर साह, राजू पुनेठा, दीपक साह, अजय गोरखा, मनीष ढेक, अनंत साह आदि शामिल रहे।
जरूरत का पांचवां हिस्सा पानी मिल रहा
लोहाघाट नगर की आबादी 20 हजार से अधिक पहुंच गई है। नगर को प्रतिदिन 2160 केएल (किलोलीटर) पानी की जरूरत है। एक हजार लीटर का एक किलाेलीटर होता है। इस समय लोहाघाट को प्रतिदिन की जरूरत का पांचवां हिस्सा ही पानी मिल पा रहा है। चौड़ी लिफ्ट पेयजल योजना, बनस्वाड़ योजना, ऋषेश्वर टयूबवैल और फोर्ती गधेरे से जरूरत के पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। 20 हजार से अधिक की आबादी की पूर्ति नहीं हो पा रही है। कई जगह टैंकरों से भी पानी बांटा जा रहा है।ये भी पढ़ें: जज की निगरानी में लोहाघाट में डेडिकल स्टोर पर पड़े छापे





